संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। बेटे का एक भी फुटबॉल मैच न छूटे, खेल के क्षेत्र में वह तरक्की कर सके, इसके लिए एक पिता ने अपनी नौकरी तक छोड़ दी। पिता की मेहनत रंगत भी लाई। महज पांच साल की उम्र में बेटे ने प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीता। सात साल की उम्र में अंडर-8 श्रेणी में यह उपलब्धि फिर दोहराई। ये कहानी आठ साल के रेयांश कुमार और उससे भी ज्यादा उनके पिता कल्पेश कुमार की है।
रेयांश के हुनर को अब नया आयाम मिला है। उनका चयन चंडीगढ़ स्थित मिनर्वा फुटबॉल अकादमी के रेजिडेंशियल प्रोग्राम के लिए हुआ है। बेटे के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए अब पूरे परिवार ने जिले से चंडीगढ़ शिफ्ट होने का फैसला लिया है, ताकि बेटे की ट्रेनिंग में कोई कमी न रहे।
उनके फुटबॉल कोच अनादी बरुआ और कृष्णा बर्नन ने बताया कि रेयांश ने महज तीन साल की उम्र में अपने हाथों में गेंद थाम ली थी। चार साल की उम्र में बरया फुटबॉल अकादमी ज्वाइन की। अंबेडकर स्टेडियम, चिल्ला स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नोएडा स्टेडियम में प्रशिक्षण लिया। पिता कल्पेश ही उनके पहले कोच रहे।
खेल के क्षेत्र में रेयांश की उपलब्धि
गोल्डन बेबी लीग अंडर-11 (2024-25), दिल्ली में रनर-अप
बीबीसीसी टूर्नामेंट, अंडर-10 सोहना (हरियाणा) में द्वितीय रनर-अप
डीपीडीएल अंडर-10 (2025-26), दिल्ली में द्वितीय रनर-अप
सिटी सुपर लीग 2025, अंडर-10 ग्रेटर नोएडा में रनर-अप