चिल्ला बॉर्डर पर भानु प्रताप सिंह के बेटे को ओम प्रताप सिंह को श्रद्धांजलि दी गई।
नोएडा। कृषि कानूनों के विरोध में 26 जनवरी को होने जा रही ट्रैक्टर परेड की तैयारियों का दौर नोएडा में भी जारी रहा। रविवार को दिनभर पुलिस के साथ किसान नेताओं की बैठकों का दौर चला। शाम को ट्रैक्टर परेड के लिए रूट तय कर दिया गया। भारतीय किसान यूनियन भानु ने 200 ट्रैक्टरों के साथ परेड निकालने का एलान किया है। वहीं, लोकशक्ति संगठन ने पुलिस-प्रशासन पर ट्रैक्टरों से नोएडा आ रहे किसानों को रोके जाने का आरोप लगाते हुए डीएनडी फ्लाईवे का रुख करने की चेतावनी दी है।
चिल्ला बॉर्डर पर धरने में पहुंचे दिल्ली पुलिस और नोएडा पुलिस के अधिकारियों ने किसान नेताओं से वार्ता की। इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों ने रणनीति तैयार की। पुलिस ने चिल्ला बॉर्डर से मयूर विहार फेज-1 रेड लाइट से बायीं ओर डीएनडी फ्लाईवे होते हुए वापस दिल्ली, नोएडा लिंक रोड के रास्ते चिल्ला बॉर्डर तक का रूट तय किया है जो रूट मैप किसानों को दिया गया है, उसके मुताबिक दिल्ली की सीमा में चार किलोमीटर और नोएडा में छह किलोमीटर एरिया आता है। रविवार शाम बैठक के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने बयान जारी कर 200 ट्रैक्टरों के साथ परेड निकालने का दावा किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि अन्य जिलों से ट्रैक्टरों के साथ किसानों को नोएडा आने दिया जाए। शांतिपूर्वक परेड निकाली जाएगी। धरना स्थल पर भानु प्रताप सिंह के बेटे ओम प्रताप सिंह की पुण्यतिथि मनाई गई। किसानों ने ओम प्रताप सिंह की पुण्यतिथि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी व दो मिनट का मौन रखा। ओम प्रताप ने तीन वर्ष पहले आत्महत्या कर ली थी। वहीं, दलित प्रेरणा स्थल पर धरना दे रहे भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर व बुलंदशहर के सभी कार्यकर्ताओं को ट्रैक्टरों व निजी वाहनों के साथ भारी संख्या में धरना स्थल पहुंचने का आह्वान किया गया है। ट्रैक्टरों को कहीं भी रोका जाता है तो इसके लिए पुलिस-प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों को रोके जाने पर दलित प्रेरणा स्थल पर चल रहे धरने को डीएनडी पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
500 किसानों को संसदीय कार्रवाई देखने की मिले अनुमति
श्यौराज सिंह ने मांग उठाई कि केंद्र सरकार बजट सत्र में कम से कम 500 किसानों को संसद में बैठकर कार्रवाई देखने की अनुमति दे। इससे किसान यह पता लगाएंगे कि कौन सी पार्टी संसद में किसानों के हित और कौन सी पार्टी विरोध में बात करती है। अब तक देश में बहुत कार्ड खेले जा चुके हैं, लेकिन अब देश की राजनीति में केवल किसान कार्ड ही चलेगा।