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किसानों ने रोका फार्म हाउस में चल रहा निर्माण

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नोएडा। अदालत के स्थगन आदेश के बावजूद फार्म हाउस में निर्माण कार्य शुरू करने पर किसानों ने मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। शनिवार को भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसान नंगली-वाजिदपुर गांव के पास बनाए गए फार्म हाउस में पहुंचे। धांधली का आरोप लगाते हुए किसानों ने हंगामा किया और काम रुकवा दिया। सूचना मिलते ही प्राधिकरण और पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने किसानों को समझाया और फार्म हाउस में चल रहे काम को भी बंद करा दिया। किसानों ने फार्म हाउस स्कीम को निरस्त करके भूखंड लौटाने की मांग की। साथ ही कहा कि ऐसा नहीं होता है तो किसान आंदोलन करेंगे।
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भाकियू के प्रदेश महासचिव पवन खटाना ने कहा कि बसपा शासनकाल में किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई थी। किसानों को आबादी के रूप में केवल 450 वर्गमीटर जमीन दी गई। जबकि फार्म हाउस के नाम पर नेताओं और बिल्डरों को साढ़े 12 बीघा जमीन दी गई। उन्होंने कहा कि जब किसानों के आबादी के लिए 450 वर्गमीटर जमीन काफी है तो फार्म हाउस बनाने वालों के लिए भी इतनी ही जमीन दी जानी चाहिए। बाकी जमीन को वापस लेकर किसानों को प्लॉट दिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की ओर से फार्म हाउस योजना पर स्थगन आदेश है। लेकिन फार्म हाउस मालिक बेसमेंट की खुदाई कर रहे हैं। इससे एनजीटी के आदेश का भी उल्लंघन हो रहा है। संगठन के जिलाध्यक्ष अनीत कसाना ने कहा कि नंगला वाजिदपुर में 2007 से 2011 तक 157 फार्म हाउस के प्लॉट काटे गए थे। प्र्राधिकरण ने किसानों की जमीन को उद्योग के लिए अधिगृहीत की थी। लेकिन बाद में उस जमीन को फार्म हाउस में तब्दील कर दिया। जब फार्म हाउस ही बनवाने थे तो किसानों के पास ही क्यों न रहने दिया गया।
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यह है प्रकरण
वर्ष 2007 से 2011 तक फार्म हाउस स्कीम लाकर प्राधिकरण ने जमीन अधिगृहीत की थी। यह जमीन खेती की थी और इसे उद्योग लगाने के लिए लिया अधिगृहीत किया गया था। मगर जमीन पर उद्योग स्थापित नहीं कर चहेते लोगों को फार्म हाउस दे दिए गए। इसमें 4600 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर तय की गई थी। मगर आरोप है कि लोगों को 3100 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से जमीन आवंटित की गई। इसे लेकर कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बाद में किसान भी अदालत की शरण में चले गए थे और उसके बाद से अभी तक इस योजना पर स्थगन आदेश है।
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