किसानों ने प्राधिकरण का कामकाज बंद करवाया, ट्रैफिक भी हुआ प्रभावित
बातचीत करने पहुंचे ओएसडी से मांगें पूरी न होने तक धरना जारी रखने को कहा
03 घंटे तक नारेबाजी, हंगामा चला
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। विभिन्न मांगें पूरी कराने के लिए सेक्टर-6 नोएडा प्राधिकरण दफ्तर के सामने किसानों ने बुधवार से धरना शुरू कर दिया। हरौला बरात घर में भारतीय किसान यूनियन मंच के बैनर तले जुटे सैकड़ों किसान नारेबाजी करते हुए दोपहर करीब एक बजे प्राधिकरण पहुंच गए। इसके बाद पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर स्वागत कक्ष के बाहर बैठ गए। इससे प्राधिकरण दफ्तर की ओर जाने वाला मुख्य रास्ता बंद हो गया। वाहन चालकों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।
किसानों ने स्वागत कक्ष बंद करवाकर कामकाज प्रभावित करवा दिया। किसान नेताओं ने प्राधिकरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अधिकारियों को प्राधिकरण छोड़ने के लिए कहा। वहीं, किसानों के बीच ओएसडी क्रांति शेखर सिंह पहुंचे और एसीईओ से वार्ता के लिए बोर्ड रूम में आमंत्रित किया लेकिन किसानों ने यह कहते हुए वार्ता से इंकार कर दिया कि वे अब चेयरमैन से वार्ता करेंगे। मांगें पूरी न होने तक धरना जारी रहेगा।
इधर, किसानों के प्रदर्शन कारण पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन प्लान बनाने के साथ पूरे इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षा-व्यवस्था के इंतजाम किए हुए थे लेकिन तीन घंटे से ज्यादा समय तक हंगामा चला। इसके बाद किसानों ने टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी।
शाम तक चली वार्ता, नतीजा नहीं निकला
शाम होने तक प्राधिकरण व पुलिस अधिकारियों ने धरना खत्म करवाने के लिए कई स्तरों पर वार्ता भी की लेकिन किसान नहीं माने। किसानों ने कहा कि वे रात में सोने के लिए घर जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को फिर प्राधिकरण दफ्तर के सामने धरना देंगे। किसान यूनियन मंच के अध्यक्ष विमल त्यागी, प्रवक्ता सुधीर चौहान, संरक्षक सुरेंद्र प्रधान, अशोक चौहान समेत अन्य किसान नेता व महिलाएं धरना स्थल पर मौजूद रहीं।
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किसानों की प्रमुख मांगें
धरना प्रदर्शन में किसान यूनियन मंच ने अपनी पुरानी मांगों को दोहराया। उन्होंने कहा कि आबादी का विनियमितिकरण जहां है, जैसा है उसी आधार पर किया जाए। सभी किसानों को 10 प्रतिशत प्लॉट दिया जाए। प्राधिकरण से आवंटित 5 प्रतिशत के प्लॉट मौके पर दिए जाएं। किसान कोटे के प्लॉट में वाणिज्यिक गतिविधियों की मंजूरी दी जाए, गांव में लगाई गई नक्शा नीति व्यावहारिक नहीं है इसे हटाया जाए। गांव में सेक्टरों की तरह विकास किया जाए।