हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी किसान
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नोएडा प्राधिकरण कार्यालय का घेराव करने के लिए 81 गांवों के किसान सुखबीर खलीफा के नेतृत्व में भारतीय किसान परिषद के बैनर तले पहुंचे, लेकिन प्राधिकरण कार्यालय पहुंचने से पहले ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। प्राधिकरण का कहना है कि किसानों की कुछ मांगें मान ली गई हैं। कुछ ऐसी मांगें हैं जो नहीं मानी जा सकती। इसमें ‘जहां है..जैसी है’ के आधार प्राधिकरण जमीन नहीं छोड़ सकता।
प्राधिकरण के ओएसडी अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि इसके अलावा किसानों की ओर से गांवों में 25 मीटर तक ऊंचाई की इमारत बनाने की अनुमति देने की मांग की जा रही है। इसे भी प्राधिकरण नहीं मान सकता। इतनी ऊंचाई की इमारत बनाने से पहले संसाधनों पर भी गौर करना चाहिए जो संभव नहीं है।
इसके अलावा किसानों की ओर से घर बनाने के लिए नक्शे पास कराने से छूट मांगी जा रही है। इन सभी मांगों पर शासन स्तर से ही निर्णय लिया जा सकता है। इसमें प्राधिकरण अपने स्तर पर किसी तरह की छूट नहीं दे सकता। आबादी विनियमितीकरण को लेकर एजेंसी का चयन किया जा रहा है।
यह एजेंसी उन किसानों को हक जरूर दिलाएगी जो पात्र हैं। एजेंसी के सर्वे के आधार पर किसानों को जमीन मिलेगी। प्राधिकरण की ओर से किसानों को लगातार सहूलियतें दी जा रही हैं। इसमें किसान सहायता प्रकोष्ठ, बेटियों को हक सहित कई सुविधाएं हैं, लेकिन किसान वार्ता के बावजूद प्रदर्शन कर रहे हैं।
रोज प्राधिकरण का घेराव करेंगे किसान: सुखबीर खलीफा
भारतीय किसान परिषद के नेता सुखबीर खलीफा ने कहा कि लोकतंत्र में एक प्रक्रिया है। प्राधिकरण-प्रशासन का आखिरी कदम जेल भेजना है। मातृभूमि और समाज के लिए जेल जाना अच्छी बात है। एक बार नहीं सौ बार जाएंगे। अन्याय के खिलाफ लड़ना है। हमने मुआवजे का पैसा नहीं लिया। अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे।
10 प्रतिशत प्लॉट एक भाई को दूसरे को 5 प्रतिशत प्लॉट अन्याय है। नक्शा नीति गांवों में व्यावहारिक नहीं है। इसे भी रद्द कराना है। अब कोई ताकत, कोई सत्ता हक के बीच नहीं आ सकती। समस्त गांवों के निवासियों से अपील है कि गुरुवार को भी प्राधिकरण कार्यालय का घेराव करने के लिए जरूर पहुंचे। रोज प्राधिकरण जाएंगे और जेल भरो आंदोलन करेंगे।