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गाजीपुर में आंदोलन को मजबूती देने पहुंचे जिले के किसान

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गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचे भारतीय किसान परिषद के कार्यकर्ता।
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नोएडा। किसान आंदोलन हर दिन रुख बदल रहा है। दिल्ली में 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में मचे बवाल के बाद बिखरे किसान संगठन एक बार फिर एकजुटता की तरफ कदम बढ़ाने लगे हैं। आंदोलन से अलग हुए गौतमबुद्ध नगर के किसान संगठनों ने गाजीपुर में बढ़ते तनाव के बाद सक्रियता बढ़ा दी है। गाजीपुर बॉर्डर पर बृहस्पतिवार को दिनभर चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच जैसे ही भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भावुकता का तीर चलाया, उसके साथ ही पश्चिमी यूपी के किसानों ने गाजीपुर की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए।
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नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर दो महीने तक धरना देकर वापस लौटने वाले भारतीय किसान यूनियन के लोकशक्ति संगठन ने भी शुक्रवार से गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन का मजबूती देने के लिए धरना शुरू कर दिया। लोकशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने शुक्रवार सुबह वीडियो जारी कर संगठन के सभी कार्यकर्ताओं को गाजीपुर धरना स्थल पहुंचने के निर्देश दिए। मुजफ्फरनगर के आसपास के कार्यकर्ताओं को नरेश टिकैत की अगुवाई में बुलाई गई महापंचायत में पहुंचने के लिए कहा गया। श्यौराज सिंह ने कहा कि लालकिले पर जो कुछ हुआ उसकी हम निंदा करते हैं, लेकिन बृहस्पतिवार को गाजीपुर धरना स्थल पर माहौल बिगाड़ने पहुंचे लोनी के भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर के विरोध में हमें राकेश टिकैत के समर्थन में पहुंचना पड़ा है।
इधर, भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय संयोजक सुखवीर खलीफा भी बड़ी संख्या में किसानों को लेकर गाजीपुर पहुंचे। उन्होंने कहा कि नरेश टिकैत ने धरना खत्म करने का एलान कर दिया था। राकेश टिकैत ने गिरफ्तारी की बात कह दी थी, लेकिन उसके बाद जो हुआ वह सही नहीं था। दिल्ली की घटना का हम विरोध करते हैं, लेकिन किसान आंदोलन कमजोर न समझा जाए। भारतीय किसान संगठन के प्रवक्ता रवि यादव भी जिले से कार्यकर्ताओं के साथ गाजीपुर पहुंचे और राकेश टिकैत को समर्थन दिया।
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दिल्ली-नोएडा की सीमाओं पर पुलिस तैयार
गाजीपुर में बढ़ते तनाव और फिर से धरने में वापस लौटते किसानों ने दिल्ली-नोएडा की सीमाओं पर फिर से पुलिस को सक्रिय कर दिया है। चिल्ला बॉर्डर से भानु गुट के वापस लौट जाने के बाद भी दिल्ली-नोएडा पुलिस की तैनाती बरकरार है। भारी संख्या में बैरिकेड धरना स्थल पर ही रखवाए गए हैं। नोएडा में जिन स्थानों पर रूट डायवर्जन किया गा था, वहां बैरिकेड, जर्सी बैरियर सहित तमाम साजो-सामान हटाया नहीं गया है।
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