दो दशक बाद किसानों का रुझान फिर से धान की ओर बढ़ा है और इस बार 65 हजार हेक्टेयर में धान की फसल हुई है, पैदावार भी अच्छी है। किसान धान लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं और वहां जाम की स्थिति बन रही है। चावल मिल नहीं होने से किसानों का धान हरियाणा और पंजाब की मंडियों में जा रहा है।
दो दशक पहले सिकंदराराऊ और सादाबाद में दो बड़े चावल मिल थे। इसी बीच किसानों का रुझान आलू की ओर बढ़ा और धान का रकबा कम होता गया। हालात यह हुए कि एक दशक पहले जिले में 15-20 हजार हेक्टेयर ही धान का रकबा रह गया था। पर्याप्त धान नहीं मिला तो दोनों चावल मिल बंद हो गए थे। इसके बाद दो चावल मिल और लगे, इनमें भी एक बंद हो गया। अब जिले में केवल एक चावल मिल चिंतागढ़ी में है, वह भी केवल सरकारी धान की खरीद कर प्रोसेस कर रहा है और तैयार चावल भी सरकारी एजेंसियों को ही दे रही है।
पिछले साल 25 हजार हेक्टेयर में धान की फसल थी, इस बार इससे 40 हजार हेक्टेयर अधिक में धान की फसल हुई। किसानों ने बताया कि जिले में बासमती 1509 और सुगंधा होता है। सुगंधा धान पूरी तरह से बाहर की मंडियों में जाता है। सादाबाद क्षेत्र में इस बार सुगंधा धान पैदावार काफी अच्छी हुई है। इस बार बारिश का मौसम भी अनुकूल रहा है और फसल भी अच्छी हुई है लेकिन जिले में किसानों की धान के खरीद करने वाली कोई चावल मिल नहीं है, जिससे यहां के आढ़ती धान खरीदकर हरियाणा और पंजाब की मंडियों में भेज रहे हैं।
-जिले में फिलहाल एक ही चावल मिल है। उसी चावल मिल पर सरकारी खरीद से मिले धान को प्रोसिंग कराया जाता है।
शिशिर कुमार , डिप्टी आरएमओ
जिले में चावल मिल नहीं हैं। अब तो यहां का धान हरियाणा व पंजाब की मंडी में जाता है। एक चावल मिल है, वह भी सरकारी खरीद का चावल ही लेती है। उसकी क्षमता भी कम है।
जानकी प्रसाद, आढ़तियां।
सरकारी खरीद यह दर हैं निर्धारित
धान कॉमन 2369 रुपये प्रति कुंतल
धान ग्रेड ए 2389 रुपये प्रति कुंतल।
धान खरीद का लक्ष्य दो हजार मीट्रिक टन।
जिले में धान का रकबा 62 हजार हेक्टेयर।
धान क्रय केंद्र 13
धान खरीद होगी एक अक्तूबर
पांच साल पहले एटा जनपद में जाता था चावल तैयार होने
हाथरस। जिले में चावल मिल न होने के कारण पांच साल पहले तक सरकारी खरीद से मिले धान से चावल निकालने के लिए एटा भेजा जाता था। एटा में धान से चावल तैयार कर फिर वापस जिले में आता था। इसके बाद इसकी आपूर्ति की जाती थी।