फर्जी कॉल सेंटर का महाजाल
फर्जी कॉल सेंटर में जॉब पोर्टल से हायर करते हैं कर्मचारी
- अंग्रेजी एक्सेंट अच्छा होने के कारण पूर्वोत्तर राज्यों के युवक युवती की अधिक डिमांड
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। फर्जी कॉल सेंटर में अहम रोल निभाने वाले अधिकतर युवक युवतियों को जॉब पोर्टल से हायर किया जाता है। जॉब पोर्टल पर रिज्यूमे देखकर मास्टमाइंड इनसे संपर्क करते हैं और ठगी के महाजाल में शामिल कर लेते हैं। इसके साथ ही दसवीं व 12वीं पास छात्रों को भी इसमें रखा जाता है। नोएडा-ग्रेनो में हाल के महीनों में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर के कर्मचारियों से पूछताछ में इसकी जानकारी मिली है। फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले मास्टमाइंड डेटा का इस्तेमाल न केवल देश व विदेश के लोगों के साथ ठगी में करते हैं बल्कि जॉब पॉर्टल के डेटा से कर्मचारियों का चयन भी करते हैं। एसटीएफ व पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कर्मचारी चयन के लिए किसी जॉब पोर्टल से डाटा लेते हैं और कॉल सेंटर में काम करने के इच्छुक लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद इन्हें अपने काम पर रखते हैं। इस फर्जीवाड़े में सबसे अहम ऐसे कर्मचारी हैं जो पहले किसी न किसी कॉल सेंटर में काम कर चुके हैं। ऐसे लोगों को टीम लीडर के तौर पर रखा जाता है। वहीं, सहयोगी की भूमिका में 10वीं व 12वीं पास युवाओं को रखा जाता है। यूपी के साइबर क्राइम एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि फर्जी कॉल सेंटर में भी ऐसे लोगों को रखा जाता है जिनकी अंग्रेजी भाषा पर पकड़ हो। इसके साथ ही फर्जीवाड़े की गोपनीयता बरकरार रखना भी इनके लिए महत्वपूर्ण होता है।
कोट्सपूर्वोत्तर राज्यों के युवक युवतियों को प्राथमिकता इन फर्जी कॉल सेंटरों में काम करने के लिए मास्टरमाइंड पूर्वोत्तर राज्यों के युवक युवतियों को प्राथमिकता देते हैं। चूंकि पूर्वोत्तर के लोगों का एक्सेंट सामान्य भारतीयों से अलग होती है। इनका एक्सेंट विदेशी एक्सेंट से मिलता जुलता है। इस कारण इन्हें टेलीकॉलिंग के लिए रखा जाता है। क्रैश कोर्स के बाद ये लोग स्क्रिप्ट के आधार पर ठगी को अंजाम देते हैं।
मास्टरमाइंड कभी नहीं आते सामने
फर्जी कॉल सेंटर मामले में गिरफ्तार युवक युवतियों ने पुलिस को जानकारी दी है कि उन लोगों का सामना कॉल सेंटर मालिक यानि मास्टरमाइंड से कभी नहीं हुआ है। यह लोग केवल कॉल सेंटर के स्थानीय हेड के अंडर काम करते हैं और उन्हीं के दिशा निर्देश पर काम को आगे बढ़ाते हैं।