नोएडा। बिजली कनेक्शन के नाम पर करोड़ों की रिश्वत मांगने व कार्य में लापरवाही बरतने के मामले में नोएडा में तैनात अधिशासी अभियंता तरुण कुमार पाठक को निलंबित कर दिया गया है। प्रथम दृष्टया दोषी मानते उन पर कार्रवाई की गई है। उनके स्थान पर अभी नई तैनाती नहीं की गई है। माना जा रहा है कि इस मामले की कई अन्य छोटे-बडे़ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। प्रबंध निदेशक स्तर से कार्रवाई के बाद उन्हें एमडी ऑफिस से अटैच कर दिया गया है।
विद्युत निगम के अधिकारियों ने बताया कि नोएडा खंड तीन में तैनात अधिशासी अभियंता तरुण कुमार पाठक एक बिल्डर को मल्टीप्वाइंट की जगह सिंगल प्वाइंट कनेक्शन जारी करने का आरोप लगा था। जबकि नियामक आयोग ने सभी बिल्डर सोसाइटियों को मल्टीप्वाइंट कनेक्शन देने का आदेश दे रखा है। इस मामले में 2 से 2.5 करोड़ रुपये रिश्वत मांगने का आरोप था। वहीं एक डाटा सेंटर की ओर से अस्थायी कनेक्शन को स्थायी कराने के लिए आवेदन किया गया था। जिसमें आवेदक ने 25 मेगावाट के लिए उक्त अधिकारी पर 2 करोड़ रुपये बतौर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। जबकि एक निजी बिल्डर को निगम के खर्च पर लाइन देने का भी आरोप लगाया गया था। इसके अलावा एक इंड्रस्ट्री को कनेक्शन देने से पहले अंडरग्राउंड लाइन बनाने में चार करोड़ का खर्च था लेकिन उसका प्रस्ताव मात्र 70 लाख रुपये का बनाया गया था। इसके अलावा अधिकारी पर कार्य में लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतों की कई माह से कमेटी जांच कर रही थी।
दो दिन पहले हुआ था दो अभियंताओं का तबादला
इससे पहले सोमवार को नोएडा में तैनात दो अधिशासी अभियंताओं का तबादला कर दिया गया था। जिन दो अधिकारियों को नोएडा भेजा गया उनमें से एक जांच कमेटी में शामिल थे। उन्होंने तुरंत जांच रिपोर्ट प्रबंध निदेशक को सौंप दी। इस वजह से तत्काल प्रबंध निदेशक अरविंद मल्प्पा बंगारी ने अधिशासी अभियंता तरुण पाठक को निलंबित कर दिया।
54 लाख के मामले में अधिशासी अभियंता को किया था बर्खास्त
गौतमबुद्घ नगर में रिश्वत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी खंड दो में तैनात रहे अधिशासी अभियंता संजय शर्मा और उनके लेखाकार 54 लाख रुपये के प्रकरण में बर्खास्त किए जा चुके हैं। दोनों ने रिश्वत की रकम सरकारी खाते में जमा करा दी थी।
खंड तीन में तैनात रहे तरुण कुमार पाठक के खिलाफ कुछ शिकायतें थीं। प्रबंध निदेशक कार्यालय से इसकी जांच चल रही थी। उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। इसके आधार पर एमडी कार्यालय से उनको निलंबित कर दिया गया है। अभी नए अधिकारी की तैनाती नहीं हुई है। - वीएन सिंह, मुख्य अभियंता, विद्युत निगम।