बिजनौर। जिले में गुलदार के हमलों की बढ़ती रफ्तार ने हर किसी को चिंता में डाल रखा है। ऐसे में अब गुलदार के पैटर्न को समझने के लिए शोध भी किए जा रहे है।
हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की रिपोर्ट वन विभाग को मिली। रिपोर्ट में बताया गया कि गुलदार के सबसे अधिक हमले शाम 4 से 7 बजे के बीच हुए, जब महिलाएं और बच्चे खुले में या खेतों में होते हैं। 2019 से अगस्त 2025 तक गुलदारों के हमलों में मारे गए 41 लोगों में 50 प्रतिशत से अधिक 20 वर्ष से कम उम्र के बच्चे और किशोर थे।
ट्रेंड्स एंड पैटर्न ऑफ ह्यूमन–लेपर्ड कॉन्फ्लिक्ट इन बिजनौर डिस्ट्रिक्ट शीर्षक से यह रिपोर्ट तैयार की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2015 गुलदार प्रभावित पांच गांव थे जो 2025 तक बढ़कर 446 हो गए हैं। 2015 से 2025 तक जिले में गुलदार के कुल 825 हमले दर्ज हुए। वहीं 2015 से 19 के बीच 72 गांवों में गुलदार की मौजूदगी दर्ज हुई थी।
वर्ष 2020–22 के बीच यह संख्या बढ़कर 155 गांवों तक पहुंची। 2023 के बाद हालात और गंभीर हुए और अब तक 446 गांव गुलदार संघर्ष की चपेट में हैं। इनमें से 40 गांव अत्यधिक संवेदनशील और 80 संवेदनशील श्रेणी में हैं। इसका एक नक्शा भी तैयार किया गया, जिसमें पूरा जिला लाल निशान से रंगा नजर आ रहा है।
n सबसे ज्यादा नगीना रेंज प्रभावित, शाम का समय खतरनाक: इस रिपोर्ट में सबसे अधिक गुलदार के हमले नगीना रेंज में होने की बात कही गई है। इस अकेली रेंज में 19 मौतें दर्ज की गईं। धामपुर और चांदपुर रेंज में पांच-पांच लोगों की मौत हुई। हमलों का पैटर्न बताता है कि शाम के वक्त (4 से 7 बजे) सबसे ज्यादा हमले हुए, जबकि सुबह (5 से 12 बजे) और रात (7 बजे के बाद) के बीच भी कई घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट पाया गया कि अधिकतर हमले खुले क्षेत्रों, खेतों और गन्ने की फसलों के बीच हुए, जहां महिलाएं चारा काटने या बच्चे खेलने गए थे।