टांडा-कलवारी पुल की तोड़ी गई सड़क।
विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। पूर्वांचल की जीवनरेखा कहे जाने वाले टांडा-कलवारी पुल की मरम्मत का कार्य सुस्त रफ्तार से चल रहा है। करीब दो माह बीत जाने के बाद भी पुल का केवल 70 प्रतिशत हिस्सा ही तोड़ा जा सका है। सितंबर में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने कार्य प्रारंभ किया था, परंतु धीमी प्रगति के कारण तय चार माह में मरम्मत कार्य पूरे होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
दुद्धी–लुंबिनी हाईवे पर स्थित यह पुल अंबेडकरनगर और बस्ती जिलों को जोड़ता है। करीब दो सवा किलोमीटर लंबा यह पुल वर्ष 2006 में सेतु निगम द्वारा 1.19 अरब रुपये की लागत से निर्मित किया गया था। बाद में इसका रखरखाव एनएचएआई को सौंपा गया। सर्वे के दौरान तकनीकी टीम ने बेयरिंग और खंभों के कमजोर होने की पुष्टि की थी, जिसके बाद मरम्मत कार्य शुरू किया गया। पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 11 सितंबर से यातायात बंद कर रूट डायवर्जन लागू किया है। अब बस्ती जाने वाले यात्रियों को बिड़हल घाट पुल होकर 65–70 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे आमजन को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है। बावजूद इसके मरम्मत कार्य रफ्तार न पकड़ने से लोगों को असुविधा हो रही है। जो सफर 10 से 15 मिनट में होता था अब उसे पूरा करने में डेढ़ से दो घंटे लग रहे हैं। एसडीएम डॉ. शशिशेखर ने बताया कि पुल के मरम्मत कार्य में तेजी लाने के लिए शीघ्र ही एनएचएआई अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।
व्यापार भी हो रहा प्रभावित
व्यापारी भूपेश जायसवाल ने बताया कि पुल बंद होने से टांडा का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कलवारी, बस्ती आदि स्थानों पर माल भेजना मुश्किल हो गया है। सकरावल मोहल्ले के निवासी अप्पू सोनी ने कहा कि यह पुल पूर्वांचल के दर्जनभर जिलों को जोड़ता है, ऐसे में प्रशासन को सुस्ती पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। तौहीद अहमद ने कहा कि पुल बंद होने से यात्रियों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।