सो अनुराग कहां अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई॥
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। जब युद्ध-भूमि में लक्ष्मण मूर्छित होकर गिर पड़े तब श्रीराम व्यथित होकर उनके पास विलाप करने लगे। उन्होंने कहा, तुम्हारा वह पुराना प्रेम और भाई के प्रति स्नेह कहां चला गया, मेरी व्याकुल वाणी सुनकर उठते क्यों नहीं? लक्ष्मण को शक्तिबाण लगने की यह लीला देखकर दर्शक भी भावुक हो गए। रविवार को सेक्टर-21ए, 62, 110, 46 और 12 की रामलीलाओं में सीता की खोज, रामसेतु निर्माण, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति और संजीवनी बूटी सहित कई प्रसंगों का मंचन हुआ।
सेक्टर-21ए स्थित रामलीला मैदान में श्री सनातन धर्म रामलीला समिति की ओर से विभीषण शरणागति, रामेश्वरम स्थापना, रामसेतु निर्माण, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति और संजीवनी बूटी लाने के प्रसंगों का मंचन किया गया। लक्ष्मण को मेघनाद का शक्ति बाण लगने से वह मूर्छित हो गए। उनके प्राण बचाने के लिए हनुमान संजीवनी बूटी लेने निकले। बूटी की पहचान नहीं होने पर वह पूरा पर्वत ही उठा लाए। संजीवनी बूटी से लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई और राम दल में खुशी छा गई। रामसेतु निर्माण और अंगद-रावण संवाद के प्रसंगों को भी कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
सेक्टर-110 स्थित महर्षि नगर की रामलीला में विभीषण ने रावण दरबार में सीता को लौटाने और श्रीराम की शरण में जाने की सलाह दी लेकिन रावण ने उन्हें लंका से निकाल दिया। इसके बाद विभीषण श्रीराम के पास पहुंचे। इसके बाद युद्ध के दौरान लक्ष्मण के मूर्छित होने पर हनुमान संजीवनी बूटी लेने निकले तो रास्ते में कालनेमि ने उन्हें रोकने के लिए छल किया। हनुमान ने उसका षड्यंत्र पहचान लिया और आगे बढ़ गए।
सेक्टर-62 स्थित रामलीला मैदान में श्रीराम मित्र मंडल नोएडा रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में सुग्रीव से मित्रता, बाली वध, सुग्रीव के राज्याभिषेक, सीता की खोज, हनुमान के लंका पहुंचने, अशोक वाटिका, अक्षय कुमार वध और लंका दहन का मंचन किया गया। सीता की खोज के दौरान संपाती ने वानर दल को बताया कि सीता लंका में हैं। इसके बाद जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्ति याद दिलाई और वह समुद्र पार कर लंका पहुंचे। अशोक वाटिका में सीता को श्रीराम की अंगूठी देने के बाद हनुमान ने वाटिका में उत्पात मचाया और अक्षय कुमार का वध कर दिया। मेघनाद उन्हें बंदी बनाकर रावण के दरबार में ले गया। रावण के आदेश पर पूंछ में आग लगाए जाने के बाद हनुमान ने लंका दहन किया।
सेक्टर-46 स्थित रामलीला मैदान में श्री राम लखन धार्मिक लीला कमेटी की ओर से सीता की खोज, राम विरह, शबरी आश्रम में श्रीराम का आगमन, राम-हनुमान मिलन, बाली वध, सुग्रीव का राज्याभिषेक, अशोक वाटिका में सीता-हनुमान मिलन, अक्षय कुमार वध और लंका दहन के प्रसंगों का मंचन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया गया।
सेक्टर-12 स्थित श्री बजरंग रामलीला संचालिका ट्रस्ट की रामलीला में शूर्पणखा के रावण दरबार में पहुंचने, सीता हरण, जटायु वध, राम-हनुमान मिलन, बाली वध, राम-सुग्रीव मित्रता और हनुमान के लंका पहुंचने के प्रसंगों का मंचन किया गया। शूर्पणखा ने रावण को खर-दूषण के वध की जानकारी दी और राम-लक्ष्मण के बारे में बताया। इसके बाद रावण ने सीता का हरण किया। सीता की खोज में निकले श्रीराम की भेंट जटायु से हुई, जिसने रावण से युद्ध किया। आगे श्रीराम और हनुमान का मिलन हुआ। हनुमान ने श्रीराम की सुग्रीव से मित्रता कराई और बाली वध के बाद सीता की खोज शुरू हुई। हनुमान लंका पहुंचे और अशोक वाटिका में सीता से मिलकर उन्हें श्रीराम की अंगूठी दी।