मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में पीडब्ल्यूडी के पास अब अपना इंजीनियरिंग कैडर होगा। बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ये निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि विकसित दिल्ली बनाने में ये मील का पत्थर साबित होगा। इससे दिल्ली की ढांचागत परियोजनाओं को गति मिलेगी जिसका लाभ सीधे तौर पर आमजन को मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म वाले आदर्श वाक्य से प्रेरित है। अभी तक पीडब्ल्यूडी के पास अपना स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर नहीं था। विभाग की इंजीनियरिंग सेवाएं केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के कैडर पर निर्भर थीं। पीडब्ल्यूडी, दिल्ली के इंजीनियरिंग विंग में कुल 36 श्रेणियों में 3214 स्वीकृत पद सीपीडब्ल्यूडी कैडर के अंतर्गत आते हैं जिन पर नियुक्तियां केंद्र सरकार की ओर से की जाती रही हैं। इस व्यवस्था के करण दिल्ली सरकार के काम की गति पर कई बार असर पड़ता था और विभाग को प्रशासनिक और विकास संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप तुरंत निर्णय लेने में अड़चन आती थी।
कई इमारतें, कार्यालय बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि नया सचिवालय, सभी 11 जिलों में मिनी सचिवालय, मंडियों, खेल मैदानों व प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने के लिए कई इमारतें व कार्यालय बनाए जाने हैं। ये तभी संभव है, जब दिल्ली का अपना इंजीनियरिंग कैडर होगा। इस गंभीर मसले पर पिछले तीस साल से कोई निर्णय नहीं लिया गया, इसीलिए कैबिनेट ने इंजीनियरों का अलग से कैडर बनाने को स्वीकृति दी है। अब दिल्ली सरकार अपने स्तर पर इंजीनियरों की भर्ती करेगी और खाली पदों को भरने की शक्ति भी होगी। इंजीनियरिंग सेवा में आत्मनिर्भर बनेगी। एक विशेष, स्थानीय अनुभव वाला इंजीनियरिंग कार्य बल मिलेगा।
भर्ती प्रक्रिया के लिए समिति गठित होगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कैडर की संरचना और कार्यप्रणाली तय करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। पहले चरण में सीपीडब्ल्यूडी के इच्छुक अधिकारी इस कैडर का हिस्सा बन सकेंगे। यदि आवश्यक संख्या पूरी नहीं होती है तो समिति की सिफारिश के आधार पर अन्य वैकल्पिक भर्ती सिस्टम अपनाया जाएगा जिसकी मंजूरी सक्षम प्राधिकारी से ली जाएगी।