फिनटेक से बायोवेस्ट और एआई से जुड़े 10 नए स्टार्टअप पंजीकृत, संख्या हुई 27
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले में स्टार्टअप के जरिये नए कारोबार के रास्ते खुल रहे हैं। बीते एक साल में यूपीआईडी में 10 नए स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं। इससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 27 हो गई है। इनमें नारियल के कचरे से उपयोगी उत्पाद बनाने से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से ट्रैवल पैकेज तैयार करने तक के कारोबार शामिल हैं।
मूलरूप से गोरखपुर निवासी अभिषेक सिंह ने बताया कि उन्होंने सेक्टर 62 स्थित यूपीआईडी के इंक्यूबेशन सेंटर में अपने स्टार्टअप पर काम शुरू किया है। उनके आइडिया को पंसद कर निजी कंपनियों ने निवेश किया। अब वह वापस गोरखपुर में अपना स्टार्टअप शुरू कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह नारियल के कचरे के सदुपयोग पर आधारित स्टार्टअप शुरू किया है। उनकी कंपनी स्ट्रीट वेंडरों से डिजिटल माध्यम से नारियल का कचरा एकत्र करती है। वेंडरों की पहचान और संग्रह व्यवस्था को जियोटैगिंग के जरिये व्यवस्थित किया जाता है। इसके बाद महिलाओं को क्वायर यानी नारियल के रेशे से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देकर रेशे, रस्सी और कोकोपीट तैयार कराया जाता है। कोकोपीट का इस्तेमाल मिट्टी के बिना खेती और अन्य आधुनिक कृषि प्रणालियों में होता है। इन उत्पादों के लिए दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु से सामग्री मंगाई जाती है।
एआई से सस्ते ट्रैवल पैकेज की तैयारी
सेक्टर 62 के इंक्यूबेशन में अपना स्टार्टअप पंजीकृत कराने वाले आरव गुप्ता का स्टार्टअप एआई आधारित ट्रैवल सेवाएं देता है। उन्होंने बताया कि वह इसके माध्यम से ग्राहक अपने बजट और पसंद के मुताबिक थाईलैंड, बाली समेत अन्य पर्यटन स्थलों के पैकेज तैयार करा सकते हैं। कंपनी यात्रा की योजना बनाने से लेकर बुकिंग तक में मदद करती है। इससे ग्राहकों को अपनी जरूरत के हिसाब से यात्रा विकल्प चुनने में आसानी होती है।
जल्द जुड़ेगें दो नए स्टार्टअप
इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज ने बताया कि जल्द ही उनके सेंटर से दो नए स्टार्टअप तैयार होने वाले हैं। जल्द ही उनके स्टार्टअप पर कंपनियां निवेश करेंगी। इसके बाद वह अपनी कंपनी शुरू करेंगे। यह स्टार्टअप फिनटेक और एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्र से जु़ड़े हैं, जो किसानों के काम काज से लेकर फाइनेंशियल रिसर्च और व्यवस्था को बेहतर करने में अपना योगदान देंगे।
हमारे यहां अभी 27 स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं, जल्द दो नए स्टार्टअप पंजीकृत होंगे, यह सिलसिला जारी है, बच्चे अपने इनोवेटिव विचारों से खुद की कंपनी शुरू कर रहे हैं।
डॉ कुमार संभव, निदेशक, यूपीआइडी, एकेटीयू नोएडा कैंपस
कोकोपीट तैयार करती महिलाएं
कोकोपीट तैयार करती महिलाएं