-डिबार कॉलेजों की सूची पहले होगी सार्वजनिक, 28 अक्तूबर तक ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे आपत्ति
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया में इस बार पारदर्शिता पर खास जोर रहेगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए तय किया है कि परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची जारी करने से पहले डिबार किए गए कॉलेजों की सूची सार्वजनिक की जाएगी। अब कॉलेजों के भौतिक सत्यापन के बाद तहसील स्तरीय समिति की संस्तुति सहित रिपोर्ट परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड करने की अंतिम तिथि 12 अक्तूबर निर्धारित की गई है। चयनित केंद्रों और छात्र आवंटन की सूची 22 अक्तूबर को अपलोड होगी। डिबार और मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई वाले विद्यालयों की सूची 23 अक्तूबर को डीआईओएस पोर्टल पर प्रदर्शित होगी। सूची पर छात्र, अभिभावक, प्रधानाचार्य और प्रबंधक अपनी आपत्ति या शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए 28 अक्तूबर अंतिम तिथि होगी।
जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रशेखर ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत परीक्षा केंद्र बनने के इच्छुक सभी कॉलेजों को अपनी आधारभूत सुविधाओं और संसाधनों का ब्योरा ऑनलाइन अपलोड करना होगा। इसके बाद विभाग की ओर से कॉलेज का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन के दौरान परीक्षा के लिए जरूरी सुविधाओं, संसाधनों और व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। मानकों पर खरे उतरने वाले कॉलेजों को ही परीक्षा केंद्र बनाए जाने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। डिबार किए गए कॉलेजों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पूर्व में प्रतिबंधित कॉलेजों का विवरण अंतिम सूची से पहले सार्वजनिक किया जाएगा। इससे संबंधित पक्षों को समय रहते आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा और परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी तरीके से पूरी की जा सकेगी।
ऑनलाइन दर्ज होगी आपत्ति
विभाग पहले डिबार किए गए विद्यालयों का विवरण सार्वजनिक करेगा। सूची जारी होने के बाद यदि किसी विद्यालय या अन्य संबंधित पक्ष को आपत्ति होती है तो वह ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकेगा। प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण डीआईओएस स्तर से किया जाएगा। इसके बाद परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया में बदलाव का मकसद परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और नकल की संभावनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है। विद्यालयों के भौतिक सत्यापन के जरिए यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि परीक्षा केंद्र के रूप में चयनित विद्यालयों में आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएं उपलब्ध हों।