नोएडा। दादरी में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण से पहले उठे विवाद पर रविवार को अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने नोएडा मीडिया क्लब में प्रेस कांफ्रेंस की। प्रेस वार्ता में गुर्जर महासभा के पदाधिकारी आचार्य वीरेंद्र विक्रम ने दावा किया कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर थे। किसी भी व्यक्ति, जाति या समुदाय को इस संबंध में साक्ष्य चाहिए तो वह हमारे पास आए। हम उन्हें साक्ष्य दिखा सकते हैं। इसके लिए वह खुली चर्चा करने को भी तैयार हैं। वह चाहते हैं प्रेमभाव से इस पर चर्चा कर विवाद को खत्म किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दादरी में प्रतिमा पर गुर्जर लिखा जाना चाहिए।
आचार्य वीरेंद्र विक्रम ने कहा कि दादरी में गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यह समस्त देशवासियों के लिए गौरव की बात है। भारत भ्रमण पर आए अरब यात्री सुलेमान ने सिलसिलात-उल-तवारीख नामक पुस्तक में उनको गुर्जर राजा बताया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को सम्राट मिहिर भोज के गुर्जर होने पर संदेह है तो हमारे पास साक्ष्य हैं। मध्यप्रदेश के कदवाहा, राजस्थान के राजोर, देवली, राधनपुर, करहाड़, सज्जन, नीलगुंड, बड़ौदा के शिलालेखों में सम्राट मिहिर भोज के नाम के पहले गुर्जर लिखा गया है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर ने कहा कि क्षत्रिय एक वर्ण है और उसमें जाट, गुर्जर, राजपूत, अहीर (यादव), मराठा जैसी जातियां आती हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कोटला मुबारकपुर में और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरिद्वार के लक्सर में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा लगवाई थीं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और जाट समाज के नेता स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा ने आज से 20 साल पहले दिल्ली के नेशनल हाईवे-24 के हिस्से का नाम गुर्जर सम्राट मिहिर भोज मार्ग रखवाया था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा ग्रेटर नोएडा में पुरातत्व विभाग की गुर्जर गैलरी का उद्घाटन किया था। उस समय तो दूसरी जाति के लोगों को कोई एतराज नहीं हुआ तो आज ऐसा क्या हुआ कि कुछ लोग विरोध पर उतर आए। प्रेसवार्ता में अलबेल सिंह घुरैया, महेश फागना, अमित खारी, ललित खारी, पप्पू मावी, अभिनव गुर्जर, मोहित मंडार, योगेंद्र बैसोया, मोहित खारी आदि मौजूद रहे।
मिहिर भोज राजपूत राजा थे, गुर्जर समाज उनको अपना न बताए : परमार
नोएडा। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने दादरी में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के नाम के पहले गुर्जर लिखे जाने पर नाराजगी जताई है। महासभा की ओर से रविवार को सेक्टर-29 में प्रेस कांफ्रेंस कर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की गई है। क्षत्रिय महासभा अध्यक्ष ऋषिपाल परमार ने साफ कहा कि मिहिर भोज राजपूत राजा थे, कोई दूसरी जाति उन्हें अपना न बताए। प्रेस वार्ता में कहा गया कि यदि सम्राट मिहिर भोज के नाम से पहले गुर्जर लिखा गया तो राजपूत समाज नाराज हो जाएगा और आने वाले चुनावों में अपनी ताकत दिखाएगा।
प्रेस वार्ता में ऋषिपाल परमार ने कहा कि गुर्जर समाज जिस सम्राट को अपना बता रहा है उनसे उनका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। यदि मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिमा का अनावरण किया तो राजपूत समाज रुष्ट हो जाएगा। उन्होंने कहा कि गुजरात पर शासन करने वाले राजा को गुर्जेश्वर या गुर्जर अधिपति की उपाधि दी जाती थी। लेकिन गुर्जर समाज सम्राट मिहिर भोज को अपने वंशज बताकर अपनी जाति से जोड़ना चाहता है। जिसका वह विरोध करते हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने साफ कहा कि वह मुख्यमंत्री के आने का विरोध नहीं करेंगे। हालांकि भविष्य में इस पर विचार करके निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सम्राट मिहिर भोज के वंशज आज भी नागौद में रहते हैं और वह स्वयं को राजपूत बताते हैं। प्रेसवार्ता में रोहताश सिंह चौहान, नरेश चौहान, जितेंद्र सिंह, मान सिंह चौहान, सतेंद्र सिसोदिया व सूर्यनारायण आदि मौजूद रहे।