उपकेंद्र में 250 केवीए तक का ट्रांसफाॅर्मर भी लगाया गया था जिसके जरिये अन्य घरों में बिजली सप्लाई की जा रही थी। पर्थला गांव में रविवार को विद्युत निगम की टीम ने छापा मारकर इसका पर्दाफाश किया। कई वर्ष पहले गांव निवासी क्षत्रु ने विद्युत निगम से कनेक्शन लिया था। कुछ साल पहले कनेक्शन का लोड बढ़वाकर 200 किलोवाट कराया गया था। इसी कनेक्शन से आसपास के घरों में बिजली दी जाती थी। कटिया निगम को सुचारू तरीके से चलाने के लिए 250 केवीए का ट्रांसफार्मर भी लगाया गया था। साथ ही एक एलटी लाइन भी पूरे इलाके में बिछाई गई थी। ये एलटी लाइन अन्य घरों तक जाती थी जिनसे घर में बिजली पहुंचती थी। सभी को अवैध तरीके से कनेक्शन देते थे।
300 में कनेक्शन, 11 रुपये प्रति यूनिट बिजली
जांच में पता चला है कि गांव में हर कनेक्शन के लिए 300 रुपये वसूले जाते थे। साथ ही 11 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जाती थी। यूनिट का हिसाब रखने के लिए घरों के बाहर सब मीटर भी लगाया गया था। आपूर्ति और बिजली बिल वसूली के लिए लगभग 6 कर्मचारियोंं को भी रखा गया था।विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता रेड अमित त्रिपाठी ने बताया 200 किलोवाट का कनेक्शन पकड़ा गया है।
6 कर्मचारियों को वसूली के लिए काम पर रखा था, केस
डूब क्षेत्र में अवैध तरीके से बिजली कनेक्शन देने वाले 6 लोगों के विरुद्ध रविवार को विद्युत निगम की ओर से सेक्टर 63 थाने में शिकायत दी गई है। अवैध गतिविधियों में लिप्त सभी सदस्य डूब क्षेत्र के ही निवासी हैं। इन्हीं के जरिये अन्य घरों में बिजली कनेक्शन दिए जाते थे। शिकायत में चोटपुर के निवासी निखिल, आदेश, शत्रुघन, आदित्य और बहलोलपुर निवासी मितेंद्र व उपेंद्र के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई है। वहीं थाना प्रभारी अमित कुमार ने बताया शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है।
10 ट्रांसफॉर्मर व केबल जब्त
चोटपुर और बहलोलपुर में कार्रवाई करते हुए विद्युत निगम ने शनिवार को दस ट्रांसफार्मर जब्त किए थे। इन ट्रांसफार्मर के जरिये डूब क्षेत्र के घरों में बिजली पहुंचाई जाती थी। सिंडिकेट चलाने वालों ने निजी स्तर पर ये व्यवस्था तैयार की थी। इनके माध्यम से वर्षों से इसी तरह हजारों घरों को बिजली पहुंचाई जा रही थी।
राजस्व में लगा रहे थे सेंध
लोग विद्युत निगम के राजस्व में सेंध लगा रहे थे। शिकायत देते हुए अवर अभियंता अनुज कुमार ने बताया कि कनेक्शन देेकर अवैध तरीके से वसूली भी लोगों से की जाती थी। इससे निगम को राजस्व में नुकसान पहुंचता था।