नई दिल्ली। एक बुजुर्ग दंपती ने एयर इंडिया के खिलाफ याचिका दायर कर पांच लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली से अमेरिका के बीच 16 घंटे लंबी उड़ान में पर्याप्त खाने तथा दवाओं का अभाव था। इस उड़ान के दौरान उन्हें केवल एक बार भोजन दिया गया जो बासी थी। जबकि दंपती में से एक मधुमेह का मरीज है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने याचिका पर गौर करते हुए कहा कि अगर ऐसा हुआ तो ये बेहद डरावना है। हाईकोर्ट ने याचिका पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय, डीजीसीए, एयर इंडिया, एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया (एएएआई) के साथ ही आईजीआई एयरपोर्ट का संचालन करने वाली आईजीएमआर एयरोसिटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
पेश याचिका 11 नवंबर 2020 को दिल्ली से सान फ्रांसिस्को के बीच एयर इंडिया की फ्लाइट से संबंधित है। दंपती ने याचिका में कहा है कि उन्होंने केबिन क्रू को बताया था कि उनमें से एक मधुमेह से पीड़ित है और उसे पर्याप्त भोजन की आवश्यकता है। इसके बाद बावजूद केवल एक बार भोजन दिया गया। पीड़ित दंपती निवेदिता और अनिल शर्मा ने ये याकिचा अधिवक्ता सुरुचि मित्तल के जरिये दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि दंपती ने कहा कि जब भी शुगर लेवल कम हुआ तो उन्हें फ्रूट डिंक का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने उस सह-यात्री का धन्यवाद किया जिसने उन्हें इस दौरान भोजन दिया जिससे उन्होंने अपनी यात्रा पूरी की।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना पर्याप्त भोजन, पानी और दवाओं जैसी बुनियादी सुविधा के एयर इंडिया को 400 लोगों की फ्लाइट संचालित करने का कोई अधिकार नहीं है। उनका कहना है कि एयर लाइन अकेले ये तय नहीं कर सकती कि इतनी लंबी उड़ान में केवल एक बार भोजन दिया जाएगा। ऐसा करके एयरलाइन उन लोगों का जीवन खतरे में डालती है जो अक्सर अपने साथ खाने पीने का सामान नहीं रखते।
बुजुर्ग दंपती ने उन्हें मुआवजा दिलाने के साथ ही उनकी टिकटों के साढ़े चार लाख रुपये भी वापस दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि एयरलाइन ने झूठे वादे कर उन्हें टिकट बेची और आपात मेडिकल स्थिति से निपटने के लिए संबंधित नियमों व कानूनों का पालन नहीं किया। इस फ्लाइट के दौरान बेहद जरूरी दवाएं भी उपलब्ध नहीं थीं।
याचिका में शिकायतों के उचित निपटारा न होने, एयरपोर्ट पर बुजुर्ग या बीमार यात्रियों के लिए क्लब कार्ट या व्हीलचेयर उपलब्ध न होने का मुद्दा भी उठाया गया है। इसके अलावा फ्लाइट की अवधि के अनुसार यात्रियों को दिए जाने वाले भोजना की मात्रा एवं गुणवत्ता पर विचार के लिए स्वतंत्र कमेटी बनाने का निर्देश डीजीसीए को दिया जाए। - एजेंसी