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Noida News: मेडिकल कॉलेज में ईसीजी का कागज भी उपलब्ध नहीं

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-दस दिन से कागज का रोल खत्म होने से नहीं हो रही मरीजों की जांच
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- इको, ईसीजी और अल्ट्रासाउंड तक प्रभावित, उठ रहे सवाल

रिजवान खान
नूंह। इलाज की आस लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले मरीजों को यहां राहत नहीं, बल्कि बेबसी का सामना करना पड़ रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस बड़े सरकारी अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव मरीजों की उम्मीदों को तोड़ रहा है। हालात यह हैं कि ईसीजी जैसी सामान्य जांच के लिए भी मरीजों को अस्पताल से बाहर निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है और अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
डॉक्टरों और जरूरी संसाधनों की कमी के चलते कई अहम जांच और इलाज प्रभावित हो रहे हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी के साथ-साथ मायूसी भी साफ दिखाई दे रही है। मेडिकल कॉलेज में पिछले करीब दस दिनों से ईसीजी मशीन के रोल खत्म हो गए हैं। ऐसे में डॉक्टरों द्वारा जांच की सलाह देने के बावजूद मरीजों की ईसीजी नहीं हो पा रही है। मजबूरन मरीजों को निजी लैब में जाकर 200 से 250 रुपये खर्च कर जांच करवानी पड़ रही है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले गरीब मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन रहा है।
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- कार्डियोलॉजिस्ट नहीं, इको जांच भी बंद :

मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होने के कारण इको की जांच भी लंबे समय से बंद पड़ी है। दिल से संबंधित समस्याओं वाले मरीजों को निजी अस्पतालों में जाकर महंगी जांच करानी पड़ रही है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने कई बार कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की मांग उठाई है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।



न्यूरो विशेषज्ञ की कमी से बढ़ रही मुश्किलें :

मेडिकल कॉलेज में न्यूरो विशेषज्ञ डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ब्रेन हेमरेज या दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों को तुरंत बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। कई मामलों में समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की जान तक चली जाती है।




रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से अल्ट्रासाउंड भी प्रभावित :

अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण अल्ट्रासाउंड जांच भी नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को निजी केंद्रों पर जाकर जांच करवानी पड़ रही है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

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ईसीजी रोल खत्म होने का मामला जैसे ही सामने आया हैं तुरंत ईसीजी रोल मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ज्यादातर सामान जेम्स पोर्टल के जरिये टेंडर प्रक्रिया से मंगाया जाता है। इसके अलावा रेडियोलोजिस्ट, न्यूरोसर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट सहित अन्य डॉक्टर मेडिकल कॉलेज में मुहैया कराने के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका हैं।

मुकेश कुमार, डायरेक्टर मेडिकल कॉलेज, नूंह।

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मेडिकल कॉलेज में कभी दवाइयों की कमी तो कभी छोटी-छोटी जांच के लिए रोल का खत्म हो जाना सरकार की लापरवाही को दर्शाता हैं। सरकार जानबूझकर जिले के लोगों के साथ दोगला व्यवहार कर रही हैं। हमारी मांग है कि जल्द डॉक्टर व अन्य सभी सुविधाएं मेडिकल कॉलेज में मुहैया कराई जाएं।

आफताब अहमद, विधायक, नूंह।



सलीना बेगम का हाथ टूटा हुआ है और ऑपरेशन से पहले डॉक्टर ने ईसीजी कराने को कहा था, लेकिन अस्पताल में रोल खत्म होने के कारण जांच नहीं हो पाई। अब बाहर पैसे देकर ईसीजी करानी पड़ रही है।
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सबीला जंग, समाजसेवी



सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद से आते हैं, लेकिन यहां छोटी-छोटी जांच भी बाहर करानी पड़ रही है। गरीब लोगों के लिए यह बहुत मुश्किल है।

साबिर हुसैन, पूर्व सरपंच, मालब



इतने बड़े मेडिकल कॉलेज में अगर डॉक्टर और मशीनों की सुविधा ही नहीं होगी तो लोगों को क्या फायदा मिलेगा। सरकार को जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति करनी चाहिए।

तौसीफ खान, समाजसेवी

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मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरो और रेडियोलॉजिस्ट की कमी लंबे समय से बनी हुई है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो मरीजों की परेशानियां और बढ़ेंगी।

मोहम्मद साबिर, मोहम्मदपुर
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