नोएडा। जिला अस्पताल में कोरोना जांच नहीं होने पर शनिवार को लोगों के सब्र का बांध टूट गया। करीब 50 लोग अस्पताल परिसर में ही जमकर हंगामा करने लगे। उन्होंने सीएमएस के कार्यालय में भी विरोध जताया। हालात इस कदर बिगड़े कि कर्मचारी से मारपीट तक की नौबत आ गई।
दरअसल, जिला अस्पताल में रोजाना 200 लोगों की ही कोरोना जांच की जाती है। यह आंकड़ा पूरा होते ही जांच बंद कर दी जाती है। शनिवार दोपहर 12 बजे तय लोगों की जांच होने के बाद काउंटर से कर्मचारियों के उठते ही लाइन में लगे लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और वे अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग में सीएमएस के कार्यालय का घेराव करने पहुंच गए, लेकिन सीएमएस नहीं थीं।
इसके बाद उन्होंने सीएमएस के निजी स्टाफ से बात की। इस दौरान सीएमएस के कार्यालय के कर्मचारियों ने हंगामा कर रहे लोगों को दोबारा जांच शुरू करने का आश्वासन देते हुए उन्हें लाइन में लगने के लिए कहा। अस्पताल परिसर में लाइन लगाने के दौरान लोगों की जांच कार्य में लगे एक कर्मचारी के साथ नोकझोंक के बीच मारपीट की नौबत आ गई। कर्मचारी ने लोगों को मारने के लिए डंडा उठा लिया। हालांकि, मीडिया कर्मियों के यहां पहुंचते ही कर्मचारी डंडा फेंककर अस्पताल की बिल्डिंग में घुस गया। इसके बाद लोग लाइन में लग गए, लेकिन जांच नहीं होने से करीब आधे घंटे इंतजार के बाद निराश होकर लौट गए।
बीमार लोगों की भी नहीं हो सकी जांच
जिला अस्पताल में जांच कराने से वंचित रहे कई लोगों को बुखार व सांस लेने की दिक्कत थी, वहीं कई लोग ऐसे थे जो गत सप्ताह कोरोना संक्रमित थे। वे अपनी कोरोना जांच कराने के लिए सुबह से लाइन में लगे हुए थे, लेकिन जांच नहीं हो पाई। कोरोना जांच के लिए लाइन में लगे सेक्टर-49 निवासी वशिष्ठ शर्मा ने बताया कि अस्पताल के कर्मचारी पीछे से जानकारों की जांच कराने में लगे रहते हैं। इस कारण जांच की दो सौ किट जल्द खत्म हो जाती है और यहां आने वाले सभी लोगों की जांच नहीं हो पाती है। जांच के लिए टोकन सिस्टम होना चाहिए।
पुलिसकर्मियों को भी करनी पड़ रही मशक्कत
निरंतर ड्यूटी दे रहे पुलिसकर्मियों को भी जिला अस्पताल में कोरोना जांच कराने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। जिले में तैनात पुलिसकर्मी अंजू शर्मा व उनके पति की काफी भागदौड़ के बाद जांच हो पाई। दंपती को बुखार, खांसी व जुकाम की शिकायत थी, लेकिन ये जिले के मूल निवासी नहीं थे। इस कारण जिले में रहने का कोई प्रमाण नहीं था। आखिर आईकार्ड के आधार पर जांच की गई।
पांच दिन से रिपोर्ट के लिए लगा रहा चक्कर
जिला अस्पताल में सेक्टर-44 निवासी मनीष ने पांच दिन पहले कोरोना जांच कराई थी, लेकिन अभी तक रिपोर्ट जारी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि वह पांच दिन से अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं। ऑनलाइन रिपोर्ट भी नहीं मिल रही है। संभावना है कि अस्पताल ने ऑनलाइन सिस्टम पर उनका ब्योरा नहीं भेजा है।
गर्भवती और कर्फ्यू में पकड़े गए लोगों की कोरोना जांच कराई गई। इसमें 200 किट खत्म हो गईं। आज अन्य लोगों की भी जांच की जाएगी। - डॉ. एचएम लवानिया, पैथॉलोजिस्ट