-बीटा-2 कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है।
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। झारखंड से किशोरवस्था में लाई गई पीड़िता को सेक्टर गामा-1 निवासी दंपती द्वारा जबरन काम कराने का मामला सामने आया है। अब बालिग हो चुकी पीड़िता को एक एनजीओ की मदद से रेस्क्यू कराकर सेक्टर-62 स्थित नोएडा के वन स्टॉप सेंटर में भेजा गया है। बीटा-2 कोतवाली पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार 20 वर्षीय पीड़िता को करीब छह वर्ष पहले झारखंड से पहले गुजरात के अहमदाबाद और बाद में ग्रेटर नोएडा लाया गया था। पिछले दिनों पीडिता ने किसी तरह अपनी 28 वर्षीय बड़ी बहन को फोन कर अपनी आपबीती सुनाई थी। बहन इस बात की जानकारी नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर एराडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर (एनसीसीईबीएल) की दी थी। मामले की जानकारी मिलते ही संगठन ने पीड़िता के ठिकाने का पता लगाया। पता चला कि वर्ष 2020 में मां की मृत्यु के बाद, जब उसके बड़े भाई-बहनों की शादी हो चुकी थी। तब एक परिचित व्यक्ति देखभाल के बहाने उसे अपने साथ ले लिया था। पहले उसे गुजरात के अहमदाबाद और फिर ग्रेटर नोएडा लाकर घरेलू कामों में लगा दिया गया। पीड़िता से घर के सभी काम कराए जाते थे। जिसमें बच्चे की देखभाल से लेकर खाना बनाना और अन्य घरेलू कार्य शामिल थे। संगठन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद एसडीएम सदर आशुतोष गुप्ता के निर्देशन में तहसीलदार ज्योत्सना सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। जिसने बीते गुरुवार को गामा-1 स्थित मकान पर पहुंचकर पीड़िता को मुक्त कराया।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी अधिकारी अमित सिंह ने बताया कि पीड़िता ने पूछताछ में बताया कि वह 18 साल की है। आधार कार्ड में उसकी आयु 20 साल लिखी है। पीड़िता को वन स्टॉप सेंटर में भर्ती कराया गया है। परिजन को सूचना दे दी गई है। वहीं बीटा-2 कोतवाली प्रभारी ने बताया कि पीड़िता ने कहा कि वह अपने घरवालों के आने के बाद ही कोई बात करेगी। पीड़िता की आयु 20 साल है। बंधक बनाने वाली बात प्रथम दृष्टया सामने नहीं आई है। पीड़िता ने बताया कि वह घर का काम करती थी। मामले में एक दारोगा को वन सेंटर भेजा है। अगर पीड़िता के परिजन या पीड़िता शिकायत करती हैं तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पीड़िता के खाते में दंपती ने जमा करा रखे हैं रुपये: प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़िता को एक दंपती ने अपने बच्चे की देखभाल के लिए रखा था। बच्चा करीब सात वर्ष का है। शुरुआत में दंपती पीड़िता को गुजरात ले गए थे। करीब ढाई साल बाद ग्रेटर नोएडा आ गए। यहां बालिका से घरेलू कार्य कराए जाते थे। हालांकि दंपति ने उसके बैंक खाते में करीब 3.5 लाख रुपये वेतन के रूप में जमा भी कराये थे। उसे प्रतिमाह 12 हजार रुपये दिए जाते थे। पूरी तरह से बंधक बनाकर रखने का मामला नहीं है। क्योंकि उसे शहर में आने-जाने की इजाजत थी लेकिन उसे अपने घर जाने की अनुमति नहीं दी जाती थी।