-कालाबाजारी की गैस 3 से 5 गुना तक महंगी, फिर भी दुकानों पर भटक रहे लोग
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई ठप होने से शहर की रसोई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और हॉस्टलों की मेस में चूल्हे ठंडे पड़ने की नौबत आ गई है। गैस की कमी और घरेलू सिलिंडरों की कथित कालाबाजारी ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि खाने-पीने की चीजों के दाम अचानक दोगुने तक पहुंचने लगे हैं। कहीं चाय 10 की जगह 20 रुपये में बिक रही है तो समोसा 20 से बढ़कर 30 रुपये का हो गया है।
जिले में मंगलवार से कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति बंद होने के कारण 10 हजार से अधिक उपभोक्ता संकट में हैं, 1000 से ज्यादा उद्योगों के पहिए थम चुके हैं और हजारों रेस्टोरेंट व हॉस्टल की मेस पर ताला लगने की कगार पर है। करीब 50 हजार छात्रों वाले हॉस्टलों में भी भोजन का संकट गहराने लगा है, जिससे कई छात्र बाहर से महंगा खाना मंगाने को मजबूर हैं। वहीं जिन जगहों पर स्टॉक या ब्लैक में सिलिंडर मिल रहे हैं, वहां भी महंगाई का तड़का लग चुका है और गैस ज्यादा खपत वाले व्यंजन मेन्यू से गायब होने लगे हैं। अगर जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो अगले एक-दो दिनों में हालात और भी गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
श्रमिकों पर पड़ी रही मार : ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों के आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में श्रमिक किराये पर रहते हैं। ज्यादातर के पास वैध कनेक्शन नहीं है। वो 5 किग्रा वाला छोटा सिलिंडर का प्रयोग करते हैं। जिसे वह कालाबाजारी करने वालों से भरवाते हैं। पहले उनको 80 से 90 रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से गैस मिल रही थी, लेकिन इस समय उनको महंगी कीमत पर भी गैस नहीं मिल रही है। बुधवार को इकोटेक तीन, एच्छर, तुगलपुर, सूरजपुर जैसी जगहों पर श्रमिक गैस लेने के लिए भटकते रहें। वो तीन से 5 गुना ज्यादा पैसा देने को भी तैयार हैं। काफी जगह महंगी दरों पर गैस भरी जा रही है।
मात्र एक उद्योग से एक लाख लोगों की रोटी बंद : औद्योगिक सेक्टर साइट-5 के उद्यमी जीएस तुली की फैक्टरी में रोटी बनती है। रोजाना 4 लाख रोटी बनती हैं। जो रेलवे, अस्पताल, स्कूल आदि जगह जाती हैं। करीब एक लाख लोगों का पेट भर रहे हैं, लेकिन इस समय रोटी बनाना संभव नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि रोजाना 30 से 35 सिलिंडर की जरूरत होती है। अब सिलिंडर नहीं मिल रहा है तो बृहस्पतिवार दोपहर तक सभी सिलिंडर खत्म हो जाएंगे। सिलिंडर के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है। ऐसे में रोटी का उत्पादन भी बंद हो जाएगा। ब्लैक में सिलिंडर लेने से नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में उद्योग को बंद करना ही बेहतर होगा।
उद्यमियों ने डीएम से मांगी तत्काल मदद : कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति बंद होने पर बुधवार को आईईए के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी मेधा रूपम से मुलाकात की और ज्ञापन देकर तत्काल गैस की आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है। आईईए के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि गैस सिलिंडर नहीं मिलने से बड़ी संख्या में उद्योग अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। उनको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया जा सकता है। उनके सामने भी बेरोजगार होने का संकट मडरा रहा है। ऐसे में प्रदेश के दूसरे जिलों में अतिरिक्त कटौती कर यहां पर आपूर्ति दी जाए।