संवाद न्यूज एजेंसी
यमुना सिटी। रमजान का तीसरा और आखिरी अशरा शुरू हो गया है। इस अशरे को इस्लाम में खास महत्व बताया गया है। इसे ‘निजात का अशरा’ कहा जाता है। इस दौरान अल्लाह अपने बंदों को जहन्नम की आग से निजात दिलाते हैं और उनकी दुआओं को कबूल करते हैं। मस्जिद के इमाम कारी मिन्हाज गुफ्रानी ने बताया कि तीसरे अशरे में अधिक से अधिक इबादत कर अल्लाह से गुनाहों की माफी और जहन्नम से बचने की दुआ करनी चाहिए।
आखिरी दस दिनों में रोजेदार इबादत, नमाज, कुरआन की तिलावत और दुआ में ज्यादा समय बिताते हैं। इस दौरान मस्जिदों में नमाजियों की संख्या बढ़ गई है। लोग रात में तरावीह और अन्य इबादतों में शामिल हो रहे हैं। इस अशरे में आने वाली शब-ए-कद्र को बेहद अहम माना जाता है।