बेल्जियम में आयोजित 24वें अंतरराष्ट्रीय फिलॉसफी ओलंपियाड में नोएडा की 17 वर्षीय दृष्टि रावत ने सिल्वर मेडल जीता है। दृष्टि ने ओलंपियाड में दार्शनिक अरस्तू की पंक्तियों पर 10 पेज का लेख लिखा, जो काफी पसंद किया गया। दृष्टि का कहना है कि मेरी कामयाबी के पीछे अभिभावक और अध्यापकों का बड़ा योगदान रहा है।
विज्ञान वर्ग से 12वीं की पढ़ाई करने वाली दृष्टि को कविताएं लिखने का बहुत शौक है। सेक्टर- 30 में रहने वाली दृष्टि ने बताया कि मेरा दोस्त अंतरराष्ट्रीय फिलॉसफी ओलंपियाड के लिए आवेदन कर चुका था। उसके बताने पर मुझे भी इसमें रुचि हुई और आवेदन कर दिया।
पहले इंडियन ओलंपियाड के आयोजक कैलाश सोनी ने आवेदन करने वाले छात्रों का दो बार टेस्ट लिया। इस टेस्ट में लखनऊ से तथागत भाटिया और नोएडा से मेरा चुनाव हुआ। उसके बाद हम लोगों को बेल्जियम बुलाया गया।
वहां 42 देशों के 90 छात्र आए हुए थे। सभी छात्रों को 4 घंटे में लेख लिखना था। इसके लिए 4 विषय दिए गए। मैंने दार्शनिक अरस्तू की पंक्तियों पर अपने विचार रखे। उन पंक्तियों के बारे में मैं क्या सोचती हूं, वो मैंने लिखा। मैंने पंक्तियों पर 10 पेज का लेख लिख दिया। मुझे लिखने और पढ़ने का बहुत शौक है, इसलिए पता ही नहीं चला कि कब 10 पेज भर गए।
इस दौरान वर्कशॉप भी आयोजित की गई, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुई हानियां, राजनीति समेत कई विषय थे। इस वर्कशॉप में हम लोगों को काफी कुछ सीखने को मिला। दृष्टि की मां प्रीति ने बताया कि दृष्टि को शुरू से ही पढ़ने का बहुत शौक है। सिर्फ अपने विषय की ही नहीं, वह अखबार और विभिन्न विषयों से जुड़ी किताबें भी पढ़ती रहती है।