गाजियाबाद। जिले के हड़प्पाकालीन और पौराणिक इतिहास सहित उसकी साहित्य और संस्कृति पर प्रशासन एक डाक्यूमेंट्री (वृतचित्र ) तैयार कर रहा है। पर्यटन विभाग से सहयोग से बनने वाली इस डाक्यूटमेंट्री की स्क्रिप्ट फाइनल हो गई है। जल्द ही इस फिल्म को बनाने का कार्य शुरू किया जाएगा। इसका बजट भी जारी कर दिया गया है।
गाजियाबाद जिले का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। इसके बारे में यहां की जनता और आने वाली पीढि़यों को पूरी जानकारी मिल सके इसके लिए जानकारी मिल सके इसके लिए प्रशासन और पर्यटन विभाग मिलकर इस फिल्म को तैयार कर रहा है। पिछले छह महीने की रिसर्च और सर्वे के बाद इसकी फाइनल स्क्रिप्ट तैयार कर ली गई है। सीडीओ अभिनव गोपाल ने बताया कि इस डाक्यूमेंट्री के जरिए गाजियाबाद के गौरवमयी इतिहास की जानकारी मिलेगी। इस फिल्म मेंं जिले के पाैराणिक महत्व, ऐतिहासिक घटनाक्रमों के साथ ही जिले की विकास गाथा और संस्कृति को भी प्रदर्शित किया जाएगा। सीडीओ ने बताया कि फिल्म को बनाने के लिए इतिहासकारों से लेकर जिले को करीब से जानने वाले जानकारों से भी मुलाकात की गई है। कुछ दस्तावेज भी प्राप्त हुए हैं, जिससे पता चलता है कि जिले का इतिहास रोचक है। यहां पर स्थित प्रसिद्ध दूधेश्वरनाथ मंदिर का रामायणकालीक इतिहास है। यहां ऋषि विश्रवा ने पूजन किया था। उस वक्त का कुआं आज भी मंदिर में मौजूद है। इसके अलावा मुगलकाल में गाजीउद्दीन ने चार गेट बनवाए और गेट के अंदर के क्षेत्र को गाजीउद्दीन नगर नाम दे दिया। मोहन नगर से दो किमी उत्तर में हिंडन नदी के तट पर स्थित केसरी के टीले पर की गयी खुदाई से पता चलता है कि यहाँ लगभग 2500 बीसी में सभ्यता विकसित हो गई थी। उन्होंने बताया कि कोटगांव का इतिहास प्रसिद्ध सम्राट समुंद्र गुप्त के साथ जुड़ा हुआ है, जिन्होंने किले और “कोट कुलजम” (कोट वंश के राजकुमारों) को नष्ट करने के बाद यहाँ अश्वमेध यज्ञ किया था, जो एक बड़ी ऐतिहासिक महत्व की घटना थी। उन्होंने बताया कि जिले मं हड़्प्पा सभ्यता के भी साक्ष्य मिले हैं। लोनी में मुगल काल का इतिहास है। हिंडन नदी के किनारे 1857 में युद्ध हुआ था जो आजादी का पहला युद्ध था। इन सभी का चित्रण इस फिल्म में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि डासना स्थित प्राचीन देवी मंदिर के बारे में भी जानकारी रहेगी। उन्होंने बताया कि 1976 से लेकर अभी तक के गाजियाबाद के विकास की कहानी भी होगी।