- एम्स ने आईआईटी दिल्ली साथ मिलकर तैयार किया कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त न्यूरोसर्जरी सिमुलेशन
-माइक्रोस्कोपिक-एंडोस्कोपिक कौशल का एआई से होगा मूल्यांकन, प्रदर्शन के आधार पर मिलेंगे नंबर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स में अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की क्लास लगेगी। इसमें डॉक्टर दिमाग की उलझी नसों को सुलझाने का गुर सीखेंगे। एम्स व आईआईटी दिल्ली की साझेदारी से तैयार हुए एआई-आधारित न्यूरोसर्जरी सिमुलेशन तय करेगा कि डॉक्टर का हाथ सर्जरी में कितना साफ है। संयुक्त प्रयास से तैयार हुए एआई तकनीक की मदद से माइक्रोस्कोपिक और एंडोस्कोपिक कौशल का स्वचालित मूल्यांकन किया जा सकेगा। इसकी मदद से न्यूरो सर्जन को सटीक रूप से मस्तिष्क की सर्जरी करना सिखाया जाएगा। दिमाग की सर्जरी सबसे जटिल होती है। इसमें छोटी से छोटी गलती मरीज की जान ले सकता है। इस तकनीकी गलतियों को सुधारने के लिए इस सिमुलेशन को विकसित किया गया है।
इस तकनीक को न्यूरोसर्जरी विभाग में इकाई के प्रमुख प्रोफेसर आशीष सूरी और न्यूरो-इंजीनियरिंग लैब के संकाय प्रभारी प्रोफेसर प्रेम कुमार कालरा, प्रोफेसर सुबोध कुमार, सीएसई विभाग, आईआईटी दिल्ली से प्रोफेसर चेतन अरोड़ा ने विकसित किया है। इस तकनीक के बारे में प्रोफेसर आशीष सूरी ने बताया कि यह तकनीक न्यूरो सर्जन को सूक्ष्म-सुतुरिंग और माइक्रो-ड्रिलिंग जैसी जटिल सूक्ष्म तकनीक के बारे में भौतिक ज्ञान देगा। साथ ही किसी भी बिना किसी गलती के हाथ-आंख की मदद से होने वाले एंडोस्कोपिक कौशल को सुधारने के लिए प्रशिक्षित करेगा। साथ ही उन डॉक्टरों को अंक देकर उनकी सर्जरी तकनीक का मूल्यांकन भी करेगा। लैब में होने वाले इस प्रशिक्षण की मदद से लाइव होने वाले न्यूरो सर्जन के मूल्यांकन का बोझ कम होगा। आने वाले दिनों में मानकीकृत प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रोटोकॉल भी तैयार हो सकेगा।
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प्रशिक्षण में आएगा बदलाव
एम्स निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा कि यह तकनीक भविष्य के सर्जनों को पढ़ाने के तरीके को बदल सकता है। इस परियोजना की मदद से एआई का इस्तेमाल करके सूक्ष्म और एंडोस्कोपिक न्यूरोसर्जरी प्रशिक्षण को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण में प्रौद्योगिकी के विकास के विकास और शोध को बढ़ावा मिलेगा।
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तकनीक से सर्जरी हो रही आसान
एम्स के न्यूरो-इंजीनियरिंग लैब के वैज्ञानिक डॉ. रमनदीप सिंह ने कहा कि 3डी प्रिंटिंग और बॉयोमैकेनिकल गुण न्यूरोसर्जिकल सिमुलेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह उसी तरह के शारीरिक मॉडल के विकास को सक्षम करते हैं, जो मस्तिष्क के ऊतकों की भौतिक विशेषताओं को सटीक रूप से दोहराते हैं। इससे सर्जनों के कौशल को निखारने में मदद मिलती है। यह तकनीक आने वाले दिनों में काफी मददगार साबित होगी।