I- शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों को लिखा पत्रI
I-15 नवंबर से 15 दिसंबर तक फिट इंडिया वीक मनाने के निर्देश I
I-एक माह के कार्यक्रम में स्कूलों को सुविधानुसार हफ्ता चुनने की छूट
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I-पेरेंट्स-टीचर मीट, फिट इंडिया शपथ, वार्षिक खेलकूद होंगे आयोजित I
Iअमर उजाला ब्यूरोI
Iनई दिल्ली। IIदेशभर के शिक्षण संस्थानों में 15 नवंबर से शुरू होने जा रहे ‘फिट इंडिया’ वीक में छात्र स्वदेशी खेल भी खेलेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों को इस संबंध में पत्र लिखा है। निर्देश दिए हैं कि 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक फिट इंडिया वीक मनाया जाए। स्कूल अपनी सुविधानुसार एक महीने तक चलने वाले कार्यक्रम में से पांच से छह दिन या एक हफ्ता चुन सकते हैं। इस दौरान पेरेंट्स-टीचर मीट, फिट इंडिया शपथ, योग, मेडिटेशन, वार्षिक खेलकूद, निबंध लेखन समेत अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। I
Iशिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सभी स्कूली और उच्च शिक्षण संस्थानों में 15 नवंबर से शुरू होने जा रहे फिट इंडिया वीक का यह पांचवां संस्करण होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिटनेस के महत्व पर जोर देते हुए 2019 में फिट इंडिया कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसका मकसद फिट इंडिया सप्ताह मनाने और स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढ़ाने और फिट इंडिया को एक जनआंदोलन बनाना था। इसके तहत शिक्षण संस्थानों में कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें क्विज, निबंध, लेख, चित्रकारी, पारंपरिक और स्थानीय खेल, योगासन, नृत्य व खेलकूद प्रतियोगिताएं शामिल हैं। पीएम ने विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके शिक्षकों और माता-पिता को भी भाग लेने का आग्रह किया था। उसके बाद से पेरेंट्स-टीचर मीट को भी शामिल किया गया है। I
Iतकनीक के इस युग में हर कोई फिटनेस को एप के माध्यम से जांचता है। ऐसे में कार्यक्रम के पारंपरिक रूप से खेलकूद आदि के माध्यम से शरीर और दिमाग की कसरत करना है, ताकि फिटनेस की आदत हम सभी की दिनचर्या में शामिल हो सके। कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी पंजीकृत स्कूलों को डिजिटल प्रमाणपत्र भी मिलेगा। I
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I19 स्वदेशी खेल भी होंगे आयोजित I
I'फिट इंडिया' कैंपेन में छात्रों को अपने देश की मिट्टी से जोड़ने के लिए भारत के 19 स्वदेशी खेलों को भी शामिल किया गया है। इसमें कबड्डी, कुश्ती अखाड़ा (4000 पुराना), खो-खो (प्राचीन भारतीय महाकाव्य महाभारत में उल्लेख), कलरीपायट्टु (15000 वीसी दक्षिण भारतीय पारंपरिक खेल), रस्साकशी (ओलंपिक में 1900 से 1920 तक भारत का हिस्सा ), मलखंब (12वीं शताब्दी में उत्पत्ति ), हेक्को (नागालैंड),स्काय (कश्मीर), छऊ और पाइका अखाड़ा (मार्शल आर्ट और सेमी क्लासिकल का अपना वर्जन), कबड्डी, थांग-ता (मणिपुर का देसी मार्शल ऑर्ट),शूटिंग बॉल, लागोरी और लंगडी (श्रीमद भागवत गीता में जिक्र), गतका, रोल बॉल, धूप और कौड़ी खेल, IIसिलंबम, गिल्ली डंडा आदि खेल भी आयोजित कर सकते हैं। I