दिव्यांगों को प्रमाण पत्र बनवाने हो रही परेशानी
नगीना। दिव्यांगजन के अधिकारों के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार सजग हैं, लेकिन उनके दफ्तरों की व्यवस्था नहीं सुधरी है। इसी कारण दिव्यांगों को सर्टिफिकेट बनवाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। गत 15 जुलाई से 30 नवंबर तक 1632 दिव्यांगों ने प्रमाण पत्र के लिए पंजीकरण कराया, लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग केवल 206 ही जारी कर पाया है। दिव्यांगों का कहना है कि फरवरी से शुरू हुई ऑनलाइन प्रक्रिया में कई खामियां हैं, जिनके कारण आवेदन ठीक प्रकार नहीं हो पाते। इससे ऑनलाइन आवेदन करते वक्त कई चीजें छूट रही हैं।
शाहपुर गांव के यूसुफ ने कहा कि वे पांच बार ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं, लेकिन दिव्यांगता सर्टिफिकेट नहीं बना है। हरेक बुधवार को जाता हूं तो कर्मचारी टरका देते हैं। सिंगलहेडी गांव के नसीर ने बताया कि उनका पैर एक वर्ष पहले कटा था। वे इसका प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटक रहे हैं। हरकेश बताते हैं कि ऑनलाइन आवेदन के बाद 15 दिन के अंदर प्रमाण पत्र बनवाने की तारीख मिलती है। जिनके मोबाइल पर मैसेज चला जाता है, उन्हें प्रत्येक बुधवार को चिकित्सा बोर्ड जांच करने के बाद प्रमाण पत्र जारी कर देता है।
इस संबंध में पूछने पर जिला अस्पताल मांडीखेड़ा के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नसीम अहमद ने कहा कि पोर्टल नया है। इस कारण सीएससी सेंटर पर आवेदन अधूरे भरे जा रहे हैं। इससे दिव्यांगों को दिक्कतें हो रही हैं। यह व्यवस्था बदली नहीं जाएगी, बल्कि इसे सुगम बनवाया जाएगा, ताकि लोगों को समस्या न हो।
लाभ पाने के लिए जरूरी है प्रमाण पत्र
जिला समाज कल्याण अधिकारी सरफराज अहमद का कहना है कि विभाग ने दिव्यांग जनों के लिए 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर छात्रवृत्ति, दिव्यांग भत्ता और मानसिक दिव्यांगों के लिए भी मदद की योजनाएं लागू कर रखी हैं। अवांछित तत्वों को योजना का लाभ उठाने देने से रोकने के लिए ही प्रमाण पत्र की योजना लागू की गई है। इसके बिना लाभ नहीं दिया जाता।