नोएडा। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में खाने के बिल भुगतान का मुद्दा फिर गरमा गया है। भोजन उपलब्ध कराने वाले ठेेकेदार ने अस्पताल के बाबुओं और वार्ड आया पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। ठेकेदार का कहना है कि जब उसने पैसे नहीं दिए तो बिलों का भुगतान रोक दिया गया।
बता दें कि जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने कोरोना मरीजों को दिए गए भोजन के बिल में गड़बड़ी की आशंका पर भुगतान रोक दिया था। ठेकेदार को बिना टेंडर प्रक्रिया का पालन किए खाना भेजने पर जवाब मांगा था। इस मामले में शनिवार को श्रीश्याम फूड प्वाइंट के संचालक हिमांशु गुप्ता ने प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष कोरोना काल की पहली लहर में जिला अस्पताल में बने क्वारंटीन वार्ड में भर्ती मरीजों को खाना परोसा गया था। दो माह का बिल करीब 7 लाख रुपये बना था। ठेकेदार का कहना है कि अस्पताल वार्ड आया व उसके पति के कहने पर खाना भेजने का कार्य शुरू किया था। तत्कालीन सीएमएस ने भी उन्हें समय पर भुगतान दिलाने का आश्वासन दिया था। लेकिन सीएमएस का ट्रांसफर होने पर बिलों का भुगतान बंद हो गया।
ठेकेदार का आरोप है कि बकाया भुगतान के लिए वार्ड आया एवं उसके पति ने कुल बिल का 15 फीसदी कमीशन मांगा था। आरोप है कि जब उन्होंने कमीशन नहीं दिया तो बिल भुगतान अटका दिया गया। ठेकेदार ने अस्पताल के एक बाबू पर 10 हजार ठगने और एक अन्य कर्मचारी पर डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया।
वहीं सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल का कहना है कि कैटरिंग ठेकेदार किस टेंडर के तहत खाना पहुंचा रहा था, इसकी जानकारी नहीं दी गई। मामला संदिग्ध होने पर भुगतान रोका गया। ठेकेदार ने 20 बेड के क्वारंटीन वार्ड में हर रोज 432 पानी की बोतल, 120 ब्रेकफास्ट, 95 लंच और 80 डिनर का बिल दिया है। ठेकेदार द्वारा पूर्व सीएमएम के हस्ताक्षर वाले 30 जून 2020 व 7 जुलाई के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। जबकि उनका तबादला 29 जून को हो चुका था। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।