25–30 एप्स और पोर्टल अपडेट ड्यूटियों के बोझ से कराह रहे शिक्षक, अध्यापकों की भारी कमी से स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई से ज्यादा समय मोबाइल एप्स और पोर्टलों ड्यूटियों पर खर्च हो रहा है। शिक्षकों पर 25–30 एप्स डाउनलोड कर डाटा अपलोड करने का इतना दबाव है कि वे कक्षाओं से ज्यादा समय मोबाइल फोन पर दे रहे हैं। वहीं, राज्य में करीब 30 हजार पद खाली हैं, जिनमें टीजीटी-पीजीटी स्तर पर विषयवार भारी असमानता है। इन हालात में बीएलओ ड्यूटी, वोटर सर्वे, लेबर कॉपी और पीपीपी सत्यापन जैसे अतिरिक्त काम छात्रों की पढ़ाई पर गंभीर असर डाल रहे हैं।
राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षक पढ़ाने के साथ ऑनलाइन एप्स चलाने, डाटा अपलोड करने में उलझे हुए हैं। शिक्षा सुधार और निगरानी के नाम पर शिक्षक अब डाटा ऑपरेटर, सर्वे कर्मचारी और प्रशासनिक क्लर्क की भूमिका निभाने के लिए मजबूर हैं।
शिक्षकों पर विद्यार्थी उपस्थिति दर्ज करने, मिड-डे मील रिपोर्टिंग, मूल्यांकन, यू-डाइस अपडेट, पीपीपी सत्यापन, लेबर कॉपी, अवसर एप, उल्लास पोर्टल, दीक्षा एप, एचआरएमएस, एमआईएस उपस्थिति, संपर्कशाला, ऑनलाइन टीचर डायरी और अन्य दर्जनों पोर्टल्स पर काम करने का दबाव है। कई शिक्षक तकनीकी दक्षता न होने के कारण स्कूल के बाद भी घंटों डाटा अपलोड करने में समय लगा रहे हैं।
अध्यापकों की कमी से पढ़ाई पर डबल मार
हरियाणा में शिक्षकों के 1,22,359 स्वीकृत पदों में से 29,866 खाली हैं। वर्तमान में 81,388 नियमित और 11,105 अतिथि अध्यापक मिलकर कुल 92,493 शिक्षक छात्रों को पढ़ा रहे हैं। विषयवार असंतुलन सबसे अधिक टीजीटी और पीजीटी स्तर पर है। टीजीटी ड्राइंग के 3,559 पद व टीजीटी विज्ञान के 1,743 पद खाली हैं जबकि पीजीटी अंग्रेजी के 724 पद, पीजीटी राजनीति विज्ञान के 560 पद और पीजीटी वाणिज्य के 271 पद खाली हैं। जिससे पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है।
वर्जन-
शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल एप्स और डाटा अपलोड में फंसे हैं। अध्यापकों की भारी कमी के बावजूद वर्ष में कई बार वोटर सर्वे कराया जाता है। शिकायतों पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।
-राजेश शर्मा, राज्य महासचिव, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
एप्स और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े बढ़ते बोझ पर संघों ने मुद्दा उठाया है। शिक्षा निदेशालय से रिपोर्ट मांगी गई है। आवश्यक जिम्मेदारियां जारी रहेंगी, पर अनावश्यक कार्य हटाने पर विचार किया जाएगा।
-महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री