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Noida News: फर्जी दस्तावेजों से 9.44 करोड़ की ठगी के आरोपी को नहीं मिली राहत

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माई सिटी रिपोर्टर
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ग्रेटर नोएडा। फर्जी दस्तावेज तैयार कर 9.44 करोड़ रुपये की औद्योगिक संपत्ति बेचने के आरोप में गिरफ्तार आरोपी जीशान अली की प्रथम जमानत अर्जी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने मामले को गंभीर प्रकृति का बताते हुए कहा कि आरोपी की संलिप्तता प्रथमदृष्टया सिद्ध होती है और विवेचना अभी जारी है।
मामला थाना साइबर क्राइम का है। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। अभियोजन के अनुसार दिल्ली निवासी व्यापारी अशोक कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने नोएडा सेक्टर-6 स्थित औद्योगिक संपत्ति एफ-42 खरीदने के लिए जीशान अली और उसके साथियों पर भरोसा कर लगभग 9.44 करोड़ रुपये का भुगतान किया। आरोपियों ने फर्जी एनओसी तैयार कर यह दिखाया कि संपत्ति पर कोई बैंक लोन बकाया नहीं है। जबकि हकीकत में उक्त संपत्ति इंडियन बैंक, सुशांत लोक (गुरुग्राम) से मॉर्गेज थी और बैंक ने उसकी नीलामी प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। बाद में पता चला कि बैंक मैनेजर के हस्ताक्षर और मोहर फर्जी थे। अदालत ने पाया कि जीशान अली जो कथित तौर पर एक मीडिया कंपनी का डायरेक्टर बताया गया। आरोपी ने वादी से रुपये लिए और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति बेचने की साजिश रची।
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अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दाखिल रिट याचिका में 1.75 करोड़ जमा करने का आदेश मानने से इंकार कर दिया था। अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने जमानत का विरोध किया। अदालत ने कहा कि यह गंभीर आर्थिक अपराध है। जिसमें आरोपी की भूमिका स्पष्ट है और विवेचना जारी है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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