-रोडवेज बसों के मुकाबले कम किराया लेकर निजी बसें भर रहीं सवारियां
-समय से पहले पहुंचने की होड़ का फायदा उठाकर सवारी भर रहे डग्गामार बस चालक
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सस्ते और समयबद्ध सफर के चक्कर में यात्री अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। शहर के प्रमुख बस अड्डों और चौराहों के आसपास निजी और डग्गामार बसों का समानांतर नेटवर्क चल रहा है। सेक्टर-37 के बॉटेनिकल गार्डन, सिटी सेंटर, एडवांट, महामाया और परी चौक से रोजाना हजारों यात्री इन बसों से सफर करते हैं। सरकारी बसों के मुकाबले 30 से 40 फीसदी तक कम किराया होने के कारण मध्यम वर्ग और रोजाना सफर करने वाले यात्री इनकी ओर खिंच रहे हैं।
यात्रियों के मुताबिक रोडवेज बस अड्डे पर पहुंचते ही निजी बसों के एजेंट कम किराये का लालच देकर यात्रियों को अपने साथ ले जाते हैं। रोज सफर करने वाले रमाकांत शर्मा ने बताया कि यदि रोजाना करीब 200 रुपये की बचत हो रही है तो लोग रोडवेज क्यों चुनेंगे। अलीगढ़ के महेश और मेरठ के रामेंद्र भी कम किराये को निजी बस चुनने की प्रमुख वजह कम पैसे और जल्द सफर पूरा करने के वादे को बताया। लेकिन इन निजी बसों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल हैं। जो पर्यटक परमिट की आड़ में स्टेज कैरिज की तरह संचालन कर रहे हैं, खासकर त्योहारों में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठा रहे हैं। कई बसों में अग्निशमन उपकरण और प्राथमिक उपचार पेटी तक नहीं होती। आपातकालीन खिड़कियों पर जाली, अतिरिक्त सीटें और अव्यवस्थित वायरिंग हादसे का खतरा बढ़ाती है।
शासन से तय रेट और नियमों पर खरा उतरना सरकारी बसों की चुनौती
परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक रोहिताश कुमार के मुताबिक त्योहारों के दौरान निजी बस संचालक मनमाना किराया वसूलते हैं, जबकि रोडवेज का किराया निर्धारित रहता है। उन्होंने बताया कि रोडवेज के टिकट में यात्री बीमा भी शामिल होता है, जो कि करीब 7 लाख रुपये का होता है। शासन की ओर से तय रेट पर ही बसों में सवार यात्रियों से किराया लिया जाता है, जब तक 60 फीसदी से ज्यादा बस में यात्री सवार नहीं होते, उनका संचालन नहीं किया जाता, इसलिए यात्रियों का इंतजार मजबूरी बन जाती है।
सरकारी और निजी बस के किराये में बड़ा अंतर
नोएडा से गंतव्य स्थान साधारण बस (रु)
सरकारी बस (रु)
लखनऊ, कानपुर 400-850
950-1200
मथुरा आगरा 150-200
250-350
अलीगढ़-बुलंदशहर 100-120
180-220
रोडवेज की बसें पूरी तरह सुरक्षित, नियमों के अनुरूप संचालित होती हैं, किराया शासन स्तर से निर्धारित है, जबकि निजी बसों में असुरक्षा और नियमों की परवाह नहीं की जाती है, जो कि जोखिम भरा होता है।
-रोहिताश कुमार, एआरएम, नोएडा डिपो, गौतमबुद्ध नगर