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Noida News: बिना लाइसेंस के तंग गलियों की ऊंची इमारतों में धड़ल्ले से चल रहे पीजी

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-दिल्ली हादसे के बाद बिना नक्शा पास, नाकाफी इंतजाम के बीच ऊंची इमारतों में चल रहे पीजी पर उठे सवाल
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ऋषभ कौशल

नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के गांवों में बिना नक्शा पास, मानकों के विरुद्ध खड़ीं बहु मंजिला इमारतों में के कमरों में पल रहे भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं। दिल्ली हादसे के बाद नोएडा में चल रहे अवैध पीजी के नाकाफी इंतजाम के बीच लोगों में डर का माहौल है।
4 फीट चौड़ी गलियों में बनीं बहुमंजिला इमारते : सेक्टर-66 मामूरा, सेक्टर-58 बिशनपुरा, नवादा, हाजीपुर, सर्फाबाद जैसे इलाकों में नोएडा प्राधिकरण से बिना नक्शा पास कराए धड़ल्ले से पांच से छह मंजिला इमारतें खड़ी कर दी गईं। हाल यह है कि इन इलाकों में जो पीजी संचालित हो रहे हैं, असल में उन तक पहुंचने के लिए सिर्फ चार फीट चौड़ी गलियां हैं। ऐसे में यदि कोई हादसा हुआ या नींव कमजोर पड़ी तो हादसे का जिम्मेदार कौन होगा। यहां तक कि आपातकालीन सेवाएं भी नहीं पहुंच पाएंगी।
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पीजी संचालकों के पास लाइसेंस नहीं : सरकार दिल्ली में पिछले महीने मालवीय नगर में हुए हादसे के बाद बीएनबी की सुविधा भी बंद कर चुकी है। ऐसे में किसी भी एक पीजी संचालक के पास कोई लाइसेंस नहीं है। कई पुराने पीजी ऐसे भी हैं जो जर्जर हालत में है, लेकिन उनकी न तो कोई देखरेख है और न ही कोई जांच का दायरा। यही कारण है कि वहां एक एक तल पर 5 से 10 कमरे बने हुए हैं, जिनमें दो से चार और छह लोग एक ही कमरे में रह रहे हैं।
ऊपरी मंजिलों से नीचे की ओर भाग भी नहीं सकेगें युवा : कई छोटे प्लाटों में चार से पांच मंजिल तक पीजी बने हुए हैं। इन इमारतों के एक-एक फ्लोर पर 5-10 कमरे बने हुए है। जिनमें दो से लेकर चार, छह युवा रह रहे हैं। लेकिन उनके लिए आपातकालीन द्वार नहीं हैं। सिर्फ एक रास्ता, वो भी सिर्फ दो से चार फीट चौड़ा, ऐसे में यदि पीजी में कोई हादसा हुआ, आगजनी हुई तो एक साथ भागने पर युवा जल्द पीजी के बाहर भी नहीं आ पाएंगे, बल्कि वह उसी में फंसे रह जाएंगे। आजकल कई पीजी में ऑटोमेटिक डोर सिस्टम भी हो गए हैं, जबकि बीते महीने लखनऊ में हुई आगजनी के दौरान ऑटोमेटिक डोर सिस्टम आगजनी के चलते बंद हो जाने के कारण भी लोग बाहर नहीं निकल सके थे।

9 की जगह 12 रुपये प्रति यूनिट की वसूली : नोएडा में चल रहे अधिकतर पीजी में संचालक पीजी में रहने आ रहे प्रवासी युवाओं से तय लगभग 9 रुपये प्रति यूनिट की दर के बजाय 12-15 रुपये प्रति यूनिट तक में बिजली देते हैं। सेक्टर 126 निवासी सागर शर्मा ने बताया कि उनके पीजी में भी यही हाल है, इसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ता है। जबकि सरकार सिर्फ 9 रुपये प्रति यूनिट व्यवसायिक भवन से लेती है।
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96 इमारतें जर्जर घोषित हुई थीं, एक भी नहीं टूटीं : 2018 में शाहबेरी में इमारत गिरने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने पूरे शहर में इमारतों का सर्वे करवाया था। 96 इमारतें पूरे शहर की जर्जर चिन्हित हुई थीं। इसके बाद इन इमारतों को तोड़ने का नोटिस चस्पा किए गए थे। लेकिन दिन बीते नोटिस जर्जर दीवारों से छूट गई। उधर जिम्मेदार अधिकारी भी यह बात भूल गए कि कार्रवाई करनी है।


अब जानें पिछले साल हुईं कुछ बड़ी घटनाएं
-15 जुलाई 2026 :
सेक्टर 66 मामूरा इलाके में एक पीजी में आगजनी के दौरान दो लोगों की मौत हुई थी, संचालक के पास फायर समेत अन्य एनओसी नहीं थी
-19 जुलाई 2026 :
सेक्टर 19 में एक पीजी की तीसरी मंजिल पर रविवार सुबह एसी में शॉर्ट‑सर्किट के कारण विस्फोट हुआ और आग लग गई थी
5 जून 2026 :
सेक्टर 52 में पीजी में आग लगी। सभी लोगों को सुरक्षित निकाला गया, कोई जनहानि नहीं हुई।
-26 अगस्त 2024 :
सेक्टर-62 के रसूलपुर नवादा में दमकल की पांच गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। कितनी घटनाएं हुई हैं।
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