(निक्की भाटी हत्याकांड) , गवाह मुकरने पर ही बच सकते हैं आरोपी
- हत्या, गंभीर चोट और साजिश जैसी गैर-समझौतावादी धाराओं में दर्ज है मुकदमा, छह वर्षीय बेटे की गवाही बनी सबसे अहम कड़ी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। चर्चित निक्की भाटी हत्याकांड में भले ही मृतका के मायके और ससुराल पक्ष के बीच पंचायत के माध्यम से समझौता हो गया हो, लेकिन कानूनी रूप से यह मामला अदालत में समझौते के जरिए समाप्त नहीं किया जा सकता। वजह यह है कि कासना कोतवाली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जिन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है वह गैर-समझौतावादी श्रेणी में आती हैं। ऐसे में अब आरोपियों के लिए राहत की स्थिति तभी बन सकती है। जब मामले के गवाह अदालत में अपने पूर्व बयानों से मुकर जाएं।
कासना कोतवाली क्षेत्र के सिरसा गांव में 21 अगस्त 2025 को निक्की भाटी की संदिग्ध परिस्थितियों में आग से झुलसकर मौत हो गई थी। मृतका की बहन कंचन भाटी, जो उसी परिवार में निक्की के पति विपिन के बड़े भाई रोहित की पत्नी है, ने इस मामले में अपने पति रोहित, देवर विपिन तथा सास-ससुर के खिलाफ नामजद तहरीर दी थी। कंचन ने खुद को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए आरोप लगाया था कि परिवार के लोगों ने मिलकर निक्की को जिंदा जलाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने चारों आरोपियों के प्राथमिकी दर्ज की थी।
पुलिस ने विस्तृत विवेचना के बाद करीब 500 पृष्ठों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की। प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण गवाही मृतका के छह वर्षीय बेटे की है। बच्चे ने अपने बयान में कहा था कि दादी ने लाइटर दिया और पापा ने थिनर डालकर आग लगाई। पुलिस ने इस बयान को केस की सबसे मजबूत कड़ी माना है। हालांकि अब दोनों पक्षों के बीच रिश्तेदारों और गांव के लोगों की मौजूदगी में पंचायत हुई है। जिसमें कई शर्तों के आधार पर समझौता होने की बात सामने आई है। इसके बाद से यह चर्चा तेज हो गई कि क्या समझौते के आधार पर मुकदमा समाप्त हो सकता है। कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसा संभव नहीं है। वहीं बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी के अनुसार हत्या और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं कानून की नजर में गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं। इन मामलों में अदालत आपसी सुलह या पंचायत के आधार पर मुकदमे को खत्म नहीं कर सकती।