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(अदालत से)
-रासुका रद्द होने के बाद भी अन्य मामले में जमानत नहीं मिलने से बाहर नहीं आ सकेंगी आकृति चौधरी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिले में अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन और हिंसा के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत की गई कार्रवाई को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। हालांकि रासुका हटने के बाद भी आकृति की जेल से तत्काल रिहाई नहीं हो सकेगी। उनके खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज 11 मुकदमों में से पांच में उन्हें जमानत मिल चुकी है, जबकि छह मामलों में निचली अदालत से अभी जमानत नहीं मिली है।
हाईकोर्ट में आकृति की ओर से रासुका की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने निवारक निरोध की प्रक्रिया को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द कर दिया। पुलिस की ओर से गिरफ्तारी के बाद निवारक निरोध का नोटिस दिए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि रासुका रद्द होने का असर उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों पर नहीं पड़ा है। आकृति के अधिवक्ता रजनीश यादव का कहना है कि जल्द ही आकृति की जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई जाएगी।
सात आरोपियों पर दर्ज हैं 11 एफआईआर : श्रमिक आंदोलन और 13 अप्रैल को हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार सात लोगों के खिलाफ जिले में कुल 11 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें एक आरोपी के खिलाफ आठ मुकदमे दर्ज हैं। सभी आरोपी वर्तमान में जेल में हैं। आरोपियों में पत्रकार सत्यम वर्मा, डीयू की छात्रा आकृति चौधरी, सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद, डीयू के इतिहास के छात्र हिमांशु ठाकुर, ऑटो चालक रूपेश रॉय, डीयू के विधि छात्र योगेश मीणा, विजुअल आर्टिस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता सृष्टि गुप्ता और फैक्टरी श्रमिक मनीषा चौहान शामिल हैं।
सृष्टि के घर फोन प्लांट करने का लगाया था आरोपः
मामले में आरोपी सृष्टि गुप्ता के अधिवक्ता ने पुलिस पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि सृष्टि की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दिल्ली के छतरपुर स्थित उनके घर में साक्ष्य के तौर पर फोन प्लांट करने का प्रयास किया। पुलिसकर्मी सृष्टि का पहले से जब्त फोन घर में रखने की कोशिश करते हैं। सीसीटीवी कैमरे पर नजर पड़ने के बाद कथित तौर पर यह प्रयास रोक दिया गया। एक अन्य फुटेज में सादे कपड़ों में एक व्यक्ति के सीसीटीवी कैमरे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का भी दावा किया गया है। दोनों फुटेज 25 अप्रैल के बताए गए हैं।
आरोप है कि पुलिस ने अदालत में उनकी गिरफ्तारी की अलग कहानी पेश करने का प्रयास किया। उनके मुताबिक, पुलिस यह दिखाना चाहती थी कि सृष्टि को नोएडा मेट्रो स्टेशन से मनीषा चौहान और रूपेश रॉय के साथ गिरफ्तार किया गया था। परिजनों का दावा है कि 25 अप्रैल को पुलिस सृष्टि को उनके घर लेकर गई थी और वहां फोन रखने का कथित प्रयास किया गया।