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Noida News: दिन में रेकी रात में करते थे सेंधमारी, गिरोह ने 100 से ज्यादा चोरियों का किया खुलासा

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सोसाइटियों में रेकी कर बंद फ्लैटों में लगाते थे सेंध, महिला समेत तीन गिरफ्तार
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- कैप-मास्क से चेहरा छिपाकर करते थे फ्लैटों की रेकी, अर्टिगा से घूमकर बंद मकानों को बनाते थे निशाना
- कोतवाली सेक्टर-113 पुलिस ने की कार्रवाई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। कोतवाली सेक्टर-113 पुलिस ने सोसाइटियों में रेकी कर बंद फ्लैटों में सेंध लगाकर कीमती सामान चुराने वाले एक अंतरजनपदीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने महिला समेत तीन आरोपियों को बुधवार को सेक्टर-123 स्थित श्मशान घाट के पास से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 3.50 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी की गहने, पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल अर्टिगा कार बरामद हुई है। कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी।
एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह ने बताया कि सोसाइटी के फ्लैट में चोरी करने वाले एक गिरोह को कोतवाली सेक्टर-113 पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस ने तीन आरोपियों बुलंदशहर निवासी कैलाश उर्फ दिवाकर (30), गाजियाबाद निवासी इरफान उर्फ इमरान (32) और बिहार निवासी सोनाली (24) को गिरफ्तार किया है। तीनों वर्तमान में नोएडा के अलग-अलग स्थानों पर रह रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने नोएडा समेत प्रदेश के कई जिलों में 100 से अधिक चोरी की वारदात करने की बात स्वीकार की है।
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पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य वारदात से पहले सोसाइटियों में घूमकर बंद फ्लैटों की तलाश करते थे। इस दौरान वे आसपास के माहौल और सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रखते थे। फ्लैट के लंबे समय से बंद होने की पुष्टि होने के बाद आरोपी वहां से निकल जाते थे। रेकी के दौरान पहचान छिपाने के लिए कैप और मास्क का इस्तेमाल किया जाता था। बंद फ्लैट की जानकारी मिलने के बाद आरोपी अर्टिगा कार से दोबारा वहां पहुंचते थे। इसके बाद मौका देखकर दरवाजे का ताला तोड़कर घर में प्रवेश करते और नकदी, जेवर, मोबाइल, लैपटॉप समेत अन्य महंगा सामान लेकर फरार हो जाते थे। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ नोएडा और मथुरा में पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं।
दिल्ली के बाजारों तक पहुंचता था चोरी का सामान : पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि गिरोह चोरी किए गए सामान को ठिकाने लगाने के लिए दिल्ली के बाजारों का सहारा लेता था। आशंका है कि चोरी के मोबाइल फोन और लैपटॉप अलग-अलग दुकानदारों को बेचे जाते थे। पुलिस अब ऐसे लोगों की पहचान करने में जुटी है, जो चोरी का माल खरीदते थे।
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सीसीटीवी से बचने के लिए बदला हुलिया : गिरोह के सदस्य सोसाइटियों में दाखिल होते समय सिर पर कैप और चेहरे पर मास्क लगाते थे। उनका मकसद सीसीटीवी कैमरों में चेहरा साफ दिखाई न देना था। रेकी के दौरान वे सामान्य लोगों की तरह सोसाइटी में घूमते और बंद फ्लैटों की जानकारी जुटाते थे। किसी मकान के लंबे समय से बंद होने की पुष्टि के बाद ही अगली कार्रवाई करते थे।
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