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Noida News: अधिवक्ता से मारपीट के विरोध में भड़के वकील, कचहरी के गेट बंद कर पुलिस को खदेड़ा

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- बिसरख कोतवाली में तैनात पुलिसकर्मियों पर अधिवक्ता और उनकी पत्नी से मारपीट का आरोप
- दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का धरना
माई सिटी रिपोर्टर

ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर जिला न्यायालय परिसर सोमवार को शांति की बजाय उबाल का केंद्र बन गया, जब गुस्साए अधिवक्ताओं ने अपने ही न्यायालय के दरवाजों को बंद कर सुरक्षा कर्मियों को खदेड़ दिया। न्यायालय के शांत माहौल में अचानक अराजकता और आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ा, और अधिवक्ताओं ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की मांग करते हुए धरना शुरू कर दिया। इस नाटकीय घटनाक्रम ने न्यायिक कार्य को ठप कर दिया जिससे वादकारियों को परेशान होना पड़ा।
असंवैधानिक कार्य का समर्थन नहीं : जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी बोड़ाकी ने बताया कि आम सभा की बैठक में घटना के कृत्य की निंदा की गई। जिन पुलिसकर्मियों ने मारपीट की थी। उन्हें निलंबित कर दिया गया है। मुकदमे के बारे में बताया गया कि अगर जरूरत पड़ी तो न्यायालय के माध्यम से मुकदमा पंजीकृत कराया जाएगा। हालांकि असंवैधानिक कार्य का समर्थन नहीं किया जाएगा। जो लोग भी ऐसा कार्य कर रहे हैं बार उनके समर्थन नहीं करती है। एक अधिवक्ता राकेश शर्मा की ओर से शिकायत की गई है कि जिन अधिवक्ता के साथ मारपीट की गई वह बार के सदस्य नहीं है। इसकी जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई।
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सभी अधिवक्ता पीड़ित के साथ : वहीं अधिवक्ता नीरज भाटी ने बताया कि मंगलवार को भी धरना जारी रहेगा। मांग पूरी नहीं होने पर पुलिस आयुक्त कार्यालय के घेराव की रणनीति भी बनाई जाएगी। प्रकरण में बार एसोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष और सचिव द्वारा दूरी बनाए रखने को लेकर भी अधिवक्ताओं में नाराजगी है। अगर अध्यक्ष और सचिव आंदोलन में सहयोग नहीं करते हैं तो जल्द ही कार्यकारी अध्यक्ष और सचिव घोषित कर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। अधिवक्ता फरीद 2022 से नियमित रूप से प्रैक्टिस कर रहे हैं। हार साल सदस्यता शुल्क अदा करते हैं। उनका पंजीकरण है। अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) पास कर रही है। वोटिंग लिस्ट में नाम न होना का मतलब यह नहीं है कि वह बार के सदस्य नहीं है। सभी अधिवक्ता पीड़ित के साथ है।
अधिवक्ता को थाने में पीटने का आरोप :

पुलिसकर्मी अधिवक्ता फरीद अहमद को जबरन गाड़ी में डालकर अपने साथ ले गए और करीब दो घंटे तक उन्हें शहर के सुनसान इलाकों में घुमाते रहे थे। इस दौरान पुलिसकर्मी लगातार उनके साथ मारपीट करते रहे और कथित तौर पर एनकाउंटर करने की धमकी भी देते रहे। बाद में उन्हें थाना बिसरख ले जाया गया, जहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने भी उनके साथ लाठी-डंडों और फट्ठों से मारपीट की। अधिवक्ता को तब तक पीटा गया जब तक वह बेहोश नहीं हो गए। मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और न ही पीड़ित अधिवक्ता का मेडिकल परीक्षण कराया गया।
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आरोपी पुलिसकर्मियों को जेल भेजने की मांगः घटना से नाराज अधिवक्ताओं ने बार एसोसिएशन परिसर में बैठक की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल नहीं भेजा जाता, तब तक किसी भी पुलिसकर्मी को जिला न्यायालय परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।


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