जोरवा गांव में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दौरान भागवत पुराण की आरती उतारते हुए भक्तगण । संवाद
मेंहदावल । तहसील क्षेत्र में राप्ती के तट पर स्थित जोरवा गांव में कथा के यजमान पूर्व प्रधानाचार्य वीरेन्द्र पांडेय, केवला देवी, व आरती पांडेय को श्रीमद्भागवत के कथा रस का अमृतपान कराते हुए तीसरे दिन अयोध्याधाम से आए कथा वाचक आचार्य धनन्जय जी महाराज ने सती प्रसंग और ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। इस कथा को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य धनंजय जी ने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे है वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो। यदि अपने गुरू,इष्ट के अपमान होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए।
चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो। कथा के दौरान सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा था।
भागवत कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए उन्होंने समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है।
इस दौरान जितेन्द्र नाथ पांडेय, सत्येन्द्र नाथ पांडेय, शिवांगी, अमन, ग्राम प्रधान रतन, हरिशंकर, पप्पू पांडेय समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।ा