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Noida News: बाढ़ के बाद पंजाब के लोगों में बढ़ रहा मानसिक अवसाद

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब में आई बाढ़ के बाद लोगों में मानसिक अवसाद तेजी से बढ़ रहा है। इस आपदा में लोगों ने न केवल अपनों की जानें गंवाई बल्कि उनके मकान, पशुधन व जमीनें भी बाढ़ की भेंट चढ़ गईं। लाखों लोग इससे प्रभावित हुए। आगे उनका भविष्य क्या रहेगा, वे कैसे फिर से बसेंगे। उनके रोजगार का क्या होगा इत्यादि कई तरह की चिंताएं बाढ़ पीड़ितों को सता रही हैं। इसी वजह से उनमें अवसाद बढ़ रहा है।
इसके अलावा कुछ माह पूर्व अमेरिका से डिपोर्ट होकर पंजाब लौटे लोग भी अवसाद से ग्रस्त हैं, क्योंकि इन परिवारों ने लाखों रुपये खर्च कर अपने बच्चों को विदेश भेजा था। बॉर्डर एरिया में आए दिन तनाव के हालात और पिछले दिनों ऑपरेशन सिंदूर की वजह से सीमा पर अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना, इन बातों ने भी लोगों के मानसिक पीड़ा दी है।
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पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री एवं परिवार कल्याण डॉ. बलबीर सिंह ने इन बातों पर चिंता जताते हुए सूबे में मानसिक स्वास्थ्य नीति को लॉन्च किया है। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तनकारी पहल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और पंजाब में सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य मंत्री के साथ मौजूद स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव कुमार राहुल ने बताया कि हमारे समाज में व्याप्त कई चीजें अकसर लोगों को चुपचाप सहने के लिए मजबूर करती हैं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति और बिगड़ती जाती हैं। मंत्री ने कहा कि हम मानते हैं कि महिलाओं पर अकसर सामाजिक और घरेलू दबावों का अत्यधिक बोझ पड़ता है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ जैसी गंभीर आपात स्थितियां जीवन और आजीविका के दुखद नुकसान के माध्यम से गहरे मनोवैज्ञानिक घाव देती हैं। यह नीति विशेष रूप से ऐसे संकट-जनित आघात के प्रति राज्य की प्रतिक्रिया को मजबूत बनाने के लिए तैयार की गई है।
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राज्य मानसिक स्वास्थ्य नीति समता, न्याय और साक्ष्य-आधारित, एकीकृत देखभाल के सिद्धांतों पर आधारित है और राज्य में प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की संख्या बढ़ाकर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग को बढ़ाएगी। इस नीति का उद्देश्य आत्महत्या के जोखिम और घटनाओं को कम करना और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त व्यक्तियों के समावेश को बढ़ावा देना है।
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