नोएडा। करीब सात वर्ष पहले नोएडा प्राधिकरण प्लॉट और फ्लैट के फर्जी अलॉटमेंट लेटर जारी कर मोटी कमाई करने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नितिन राठी प्रकरण की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। जांच के बाद अब साफ हो गया है कि चौकीदार नितिन राठी पर जल्द ही बर्खास्तगी की कार्रवाई हो सकती है। आरोपी ने प्राधिकरण ने 47 प्लॉट व फ्लैट आवंटन के फर्जी अलाटमेंट लेटर जारी किए गए थे। उनके एवज में मोटी रकम वसूली गई थी। इस मामले में पैसा वसूलने की पुष्टि के बाद नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में गबन की गई रकम का जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो उसकी बर्खास्तगी की फाइल आगे बढ़ा दी जाएगी। अहम है कि पिता की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर नितिन राठी को प्राधिकरण में चौकीदार की नौकरी मिली थी।
पब्लिक नोटिस जारी कर शिकायतकर्ताओं को बुलाया था
अधिकारियों ने बताया कि मामले में प्राधिकरण की ओर से पब्लिक नोटिस जारी किया गया था। लोगों से नितिन राठी के खिलाफ किसी भी तरह की शिकायत की जानकारी देने को कहा गया था। नोटिस के बाद कई लोगों शिकायत दर्ज कराई थी साथ ही साक्ष्य भी जमा कराए थे। जिसके आधार पर प्राधिकरण ने धोखाधड़ी समेत कई मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
लोगों को हर काम कराने का देता था झांसा
प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2015 से पूर्व के निरस्त प्लाट व स्वत: छोड़े जाने वाले प्लांटों की स्कीम निकाली जाती थी। नितिन राठी इन फ्लैटों और प्लॉट के फर्जी आवंटन लेटर बनाकर लोगों को देता था। संदेह से बचने के लिए वह कुछ पैसे प्राधिकरण के खाते में भी जमा कराता था। आरोपी खासतौर पर निरस्त फ्लैट-प्लॉट को की तलाश करके फर्जी अलॉटमेंट लेटर जारी कर देता था। रजिस्ट्री कराने का समय आने पर पूरे प्रकरण का खुलासा हुआ। नितिन राठी ने नोएडा में ईडब्ल्यूएस योजना के फ्लैट दिलाने के लिए एक ही परिवार के 6 लोगों से ठगी की थी। वह खुद को सीईओ समेत अन्य बडे़ अधिकारियों के करीबी होने का दावा करता था।