नई दिल्ली। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने शनिवार को आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार बस मार्शलों से अन्याय कर रही है। सरकार ने अब नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर उन मार्शलों के भविष्य को अंधकार में धकेलने की योजना बना ली है, जिनकी पहले बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के नियुक्ति की गई थी और फिर हटा दिया गया।
उन्होंने मुख्यमंत्री आतिशी से पूछा कि क्या नई मार्शल भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है या यह भी उपराज्यपाल के पास जाकर केवल चुनावी स्टंट बनकर रह जाएगी। उन्होंने कहा कि क्या पहले से निकाले गए मार्शलों की फिर से नियुक्ति की जाएगी, क्योंकि नई प्रक्रिया के तहत ऐसा संभव नहीं लगता। दरअसल, दिल्ली सरकार पहले यह तय करेगी कि कितने बस मार्शल चाहिए। इसके बाद यह फाइल प्रशासनिक सुधार विभाग के पास भेजी जाएगी। यह विभाग अध्ययन कर बताएगा कि मार्शल पद के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए और कितने पदों पर भर्ती की आवश्यकता है। इसके बाद फाइल वित्त मंत्रालय को भेजी जाएगी, जो वार्षिक बजट के अनुसार खर्च का निर्धारण करेगा। इसके बाद ही सरकार भर्ती प्रक्रिया की मंजूरी देगी। सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भर्ती की फाइल उपराज्यपाल के पास भेजी जाएगी। उनकी मंजूरी के बाद सर्विस विभाग मार्शलों की नियुक्ति के लिए सार्वजनिक तौर पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा। आवेदकों को पहले टेस्ट और फिर साक्षात्कार से गुजरना होगा, जिसके बाद उन्हें नियुक्त किया जाएगा। जब सरकार केवल काम चलाने के लिए मार्शलों की भर्ती कर रही है, तो 10,000 से अधिक निकाले गए मार्शलों को न्याय कैसे मिलेगा। न केवल मार्शल, बल्कि अन्य सरकारी विभागों में भी सिर्फ अस्थायी या ठेके पर भर्तियां की जा रही हैं।