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Noida News: खेल सुविधाएं विकसित करने के साथ जीएसटी का रोड़ा करें दूर

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खेल सुविधाएं विकसित करने के साथ जीएसटी का रोड़ा करें दूर
- निजी स्टेडियम में खेल सुविधाओं के बदले चुकाना पड़ता है 18 फीसदी जीएसटी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। खेल व खिलाड़ियों को बेहतर और किफायती सुविधाएं मिले, इसके लिए खेल सुविधाओं को अपग्रेड किया जाए। गांव व सेक्टरों के बीच खेल मैदान को स्वीकृति दी जाए। जब जिले के खिलाड़ी सुविधाओं के लिए दूसरे जिलों का रुख करें और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के अभ्यास के लिए मैदान न हों तो इस स्थिति में स्थानीय सांसद से अपेक्षाएं कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं। खिलाड़ियों की मांग है कि सबसे पहले जो खेल सुविधाएं मिल रही हैं, उसी में रियायत दिलाने का प्रयास किया जाना चाहिए। खेल प्रशिक्षण या खेलने के लिए स्टेडियम की बुकिंग कराने के लिए वसूली जाने वाली 18 फीसदी जीएसटी को पूरी तरह से खत्म कराने की जरूरत है। फिलहाल गौतमबुद्ध नगर में सरकारी स्तर पर खेल सुविधाओं के नाम पर एक भी हॉस्टल की सुविधा नहीं हैं। यहां से जो भी खिलाड़ी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निकलते हैं, उनके पीछे परिवार काफी मोटी रकम प्रशिक्षण पर खर्च कर चुका होता है। इससे जाहिर है कि गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चों की प्रतिभा कहीं न कहीं आर्थिक मजबूरी के आगे हार मान ले रही है। प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सस्ती दरों पर खेल प्रशिक्षण देने के साथ खेल सुविधाएं विकसित करने व फीस में कमी लाने और जीएसटी से छूट मिलनी बेहद जरूरी है।

कोट:
शहर में खिलाड़ियों के लिए सरकारी स्तर पर खेल सुविधाओं का हमेशा से टोटा रहा है। यहां के खिलाड़ियों ने क्रिकेट, तैराकी, बैडमिंटन, फुटबॉल, कबड्डी, कुश्ती समेत तमाम खेलों में पदक जीते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को स्थानीय सांसद से उम्मीद है कि वह उनके हितों के लिए खेल सुविधाओं को जमीनी स्तर पर सुधारने की दिशा में प्रयास करें।- अमित सिंह, जिलाध्यक्ष यूपी स्पोर्ट्स कराटे एसोसिएशन गौतमबुद्ध नगर।
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- क्रिकेट में जिले के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा दिखाते हुए उम्दा प्रदर्शन किया है। इसके बाद भी जिले में सरकारी स्तर पर अभ्यास करने के लिए बेहतर स्टेडियम नहीं हैं। स्थानीय सांसद से उम्मीद है कि बेहतर खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने के लिए हर गांव व सेक्टर में क्रिकेट मैदान विकसित कराने की ओर ध्यान दें। - तालिब, क्रिकेटर व कोच।
- एथलेटिक्स खिलाड़ियों की सालों से सिंथेटिक ट्रैक की मांग रही है। ट्रैक की कमी से जूझ रहे जिले के खिलाड़ियों को हरियाणा और दिल्ली का रुख करना पड़ रहा है। स्थानीय सांसद जिले में बेहतर सिंथेटिक ट्रैक बनवाने की दिशा में काम करें, यह एथलीटों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं होगा। - अशोक सैनी, पूर्व एथलेटिक्स खिलाड़ी व कोच।
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- जिले के खिलाड़ियों के लिए सरकारी स्तर पर कुश्ती खेलने व अभ्यास की सुविधा नदारद है। निजी स्तर पर कुछ पहलवान कुश्ती खिलाड़ियों की पौध तैयार करने में जुटे हुए हैं। प्राधिकरण ने कुश्ती के नाम पर बनाए गए मिनी इंडोर स्टेडियम को भी मुनाफा का सौदा बना लिया है। स्थानीय सांसद से उम्मीद है कि वह मिनी इंडोर स्टेडियम में कुश्ती अभ्यास के लिए खुलवाने का प्रयास करें। - सुबोध कुमार, पूर्व अंतरराष्ट्रीय पहलवान।
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