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Delhi: कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने की दिशा में एक कदम और बढ़ा दिल्ली एयरपोर्ट, बिजली की खपत में 57 फीसदी कमी

Sun, 02 Jun 2024 06:30 PM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

ग्रीन बिल्डिंग निर्माण पर विशेष रूप से बल दिया गया है। हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग, बैगेज हैंडलिंग सिस्टम, सूचना प्रौद्योगिकी, एयरसाइड ग्राउंड लाइट, एस्कलेटर, ट्रेवलेटर को स्वचालित उपयोग में लाया गया है।
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दिल्ली एयरपोर्ट - फोटो : iStock
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विस्तार
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कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने की दिशा में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तेजी से आगे बढ़ रहा है। निर्धारित लक्ष्य 2030 तक यह एयरपोर्ट शुद्ध कार्बन उत्सर्जन वाला बनेगा। इसी कड़ी में दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने बिजली खपत को कम करने में उपलब्धि हासिल की है। 2010 में जब इस एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 को शुरू किया गया तब से अबतक प्रति यात्री बिजली की खपत में 57 फीसदी की कमी की है। इसके लिए अक्षय उर्जा श्रोत को अपनाया गया है। ताकि कार्बन उत्सर्जन को शून्य किया जा सके।

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2010 में जब टर्मिनल-3 चालू किया गया था। उस समय प्रति यात्री बिजली की खपत 5.18 किलोवॉट प्रतिघंटा थी। अब यह घटकर 2.21 किलोवाट प्रतिघंटा हो गई है। डायल के सीईओ विदेह कुमार जयपुरिया के अनुसार, सर्विस और यात्रियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए विशिष्ट ऊर्जा खपत में साल-दर-साल कमी लाने पर जोर दिया जा रहा है। ग्रीन बिल्डिंग निर्माण पर विशेष रूप से बल दिया गया है। हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग, बैगेज हैंडलिंग सिस्टम, सूचना प्रौद्योगिकी, एयरसाइड ग्राउंड लाइट, एस्कलेटर, ट्रेवलेटर को स्वचालित उपयोग में लाया गया है। एलईडी लाइटों का उपयोग और वास्तविक समय की निगरानी और नियंत्रण की जा रही है।

100 फीसदी एलईडी लाइट लगेंगी
सीईओ ने बताया कि ऊर्जा खपत को अन्य तकनीक के माध्यम से कम किया गया है। इस व्यवस्था में निरंतर सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। एयरसाइड पर एक 7.45 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। इसके अलावा 100 प्रतिशत एलईडी लाइट्स लगाने का लक्ष्य जल्द ही पूरा किया जाएगा।

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