फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida News: सर्दी की देरी से ठंडी पड़ी गर्म कपड़ों की बिक्री, व्यापारी निराश

विज्ञापन
विज्ञापन
-राजधानी के बाजारों जैकेट, स्वेटर, मफलर और रजाइयों की ब्रिकी ठप पड़ी
विज्ञापन



संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सर्दियों की दस्तक इस बार कुछ देर से हो रही है। नवंबर की शुरुआत के बावजूद ठंड का असर अभी तक महसूस नहीं हुआ है। इसी कारण बाजारों में गर्म कपड़ों की बिक्री पर भी असर पड़ा है जिससे निराशाजनक स्थित बनी हुई है। सरोजिनी नगर, लाजपत नगर, करोल बाग और तिलक नगर जैसे प्रमुख बाजारों में जैकेट, स्वेटर, मफलर और रजाइयों की दुकानें सज चुकी हैं, लेकिन ग्राहक फिलहाल कम दिखाई दे रहे हैं।



सरोजिनी नगर मार्केट , जनपथ, लाजपत, चांदनी चौक के व्यापारियों के मुताबिक, आमतौर पर अक्टूबर के अंत तक गर्म कपड़ों की खरीदारी शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार मौसम में देरी के कारण ग्राहकों की भीड़ नहीं जुटी है। पंजाब के पटियाला और हरियाणा के पानीपत से रोजाना बड़ी मात्रा में ऊनी कपड़े दिल्ली पहुंच रहे हैं, पर बिक्री की रफ्तार धीमी है। सरोजिनी मार्केट एसोसिएशन का कहना है कि हमने अक्टूबर के पहले हफ्ते में नया स्टॉक मंगवाया था, लेकिन तापमान कम न होने से खरीदार नहीं आ रहे। पहले जहां रोजाना हजारों की बिक्री होती थी, अब सैकड़ों में सिमट गई है।
विज्ञापन

व्यापारी अब उम्मीद कर रहे हैं कि नवंबर के दूसरे सप्ताह से मौसम में बदलाव आएगा और इसके साथ ही ग्राहक भी बाजारों में लौटेंगे। शादी का सीजन शुरू होने से भी बिक्री में तेजी की संभावना जताई जा रही है। ग्राहक पक्ष का कहना है कि मौसम ठंडा न होने से लोग अभी हल्के कपड़ों में ही सहज महसूस कर रहे हैं। प्रीत विहार निवासी आरती शर्मा कहती हैं कि हम हर साल दिवाली के बाद स्वेटर और जैकेट खरीदते हैं, लेकिन इस बार इतनी गर्मी है कि अब तक जरूरत ही नहीं पड़ी। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में तापमान में गिरावट नवंबर के मध्य तक आने की संभावना है। जैसे ही पारा गिरेगा, बाजारों में गर्म कपड़ों की मांग तेजी से बढ़ेगी। फिलहाल सर्दी की देरी ने जहां लोगों को राहत दी है, वहीं बाजारों की रौनक फीकी कर दी है।
विज्ञापन


वर्जन
हमने अक्टूबर के पहले हफ्ते में नया स्टॉक मंगवाया था, लेकिन तापमान कम न होने से खरीदार नहीं आ रहे। पहले जहां रोजाना हजारों की बिक्री होती थी, अब सैकड़ों में सिमट गई है।
अशोक रंधवा, अध्यक्ष, सरोजिनी मार्केट एसोसिएशन

जैकेट, स्वेटर, मफलर और रजाइयों की दुकानें सज चुकी हैं, लेकिन ग्राहक फिलहाल कम दिखाई दे रहे हैं।
- मोहम्मद हयात, अध्यक्ष,जनपथ मार्केट एसोसिएशन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें