50-54 वर्ष आयु वर्ग में शानदार प्रदर्शन, एशियाई तैराकी चैंपियनशिप में जीते तीन पदक
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जिस उम्र में लोग बढ़ती उम्र का हवाला देकर नए लक्ष्य तय करने से कतराने लगते हैं, उस उम्र में ग्रेटर नोएडा की तैराक प्रेरणा चौहान ने अपने हौसले, मेहनत और जुनून से सफलता की नई इबारत लिखी है। बेंगलुरु में आयोजित दूसरी एशियन स्विमिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रेरणा ने एक रजत और दो कांस्य पदक अपने नाम किए। उनकी इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
बेंगलुरु में 04 से 10 अक्टूबर तक आयोजित सात दिवसीय एशियाई तैराकी चैंपियनशिप में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में एशिया, ओशिनिया और मध्य पूर्व के करीब 53 देशों के तैराकों ने अलग-अलग आयु वर्गों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसमें 25 से 80 वर्ष और उससे अधिक उम्र के खिलाड़ियों ने विभिन्न व्यक्तिगत और अन्य निर्धारित स्पर्धाओं में भाग लिया। अनुभवी खिलाड़ियों के बीच हुई इस प्रतियोगिता में तैराक प्रेरणा चौहान ने 50 से 54 वर्ष आयु वर्ग में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। एथलीट ने प्रतियोगिता में तीन पदक जीतकर ग्रेटर नोएडा का नाम रोशन किया। उन्होंने 4×50 मीटर फ्रीस्टाइल रिले स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। इसके अलावा 4×50 मीटर मिक्स्ड मेडले रिले और 200 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में इजाफा किया। अलग-अलग स्पर्धाओं में उनके प्रदर्शन ने उनकी निरंतर मेहनत, फिटनेस और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाया। इस चैंपियनशिप का आयोजन स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से किया गया। प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिला। ऐसे आयोजनों के माध्यम से अनुभवी खिलाड़ियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित करने का मंच मिलता है। प्रेरणा चौहान की उपलब्धि उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो उम्र बढ़ने के साथ अपने सपनों और लक्ष्यों को सीमित कर लेते हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि नियमित अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी उम्र में नई उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। एशियाई चैंपियनशिप में तीन पदक जीतकर उन्होंने न केवल अपनी खेल प्रतिभा का परिचय दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि जुनून बरकरार हो तो सफलता की राह उम्र की सीमाओं से आगे निकल जाती है।