ग्रेटर नोएडा से ढाबा संचालक के अगवा बेटे कुणाल (15) का शव रविवार को बुलंदशहर के गांव ज्वारखेड़ा के पास गंगनहर से मिला। किशोर के गले पर निशान की वजह से गला दबाकर हत्या किए जाने की आशंका है। पांच दिनों तक बच्चे का पता न लगा पाने पर गुस्साए परिजनों ने गौतमबुद्धनगर पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और जाम लगाया।
रबुपुरा थाना क्षेत्र के गांव म्याना आकलपुर निवासी कृष्ण कुमार शर्मा का ग्रेटर नोएडा में ढाबा है। एक मई की दोपहर वह काम से बाहर गए थे। तभी कार सवार कुछ लोगों ने उनके बेटे कुणाल का अपहरण कर लिया। परिजनों ने रिश्तेदारों पर अपहरण का आरोप लगाया था। शव मिलने पर बुलंदशहर पुलिस ने परिजनों व गौतमबुद्धनगर पुलिस को सूचना दी।
अपहरण में महिला भी शामिल
वारदात की सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, एक मई को ढाबे से कुछ दूर एक कार रुकी। एक महिला उतरी, ढाबे में गई और खाना पैक करवाया। महिला ने कुणाल को कार तक खाना पहुंचाने के लिए कहा। कार के निकट पहुंचते ही कुछ लोगों ने उसे गाड़ी में खींच लिया और अगवा कर ले गए।
कार पर स्कूटी का नंबर
जिस कार से कुणाल का अपहरण हुआ, उसका नंबर पुलिस ने ट्रेस किया, तो स्कूटी का नंबर लगा मिला। आरोपियों ने शातिराना तरीके से वारदात की। कार की नंबर प्लेट बदलकर अपहरण किया।
आरोपियों को शह, पीड़ितों पर कहर बरपाती रही पुलिस
कुणाल के अपहरण से लेकर पोस्टमार्टम के बाद शव ले जाने तक पुलिस की भूमिका पर परिजन सवाल उठाते रहे। कुणाल के पिता कृष्ण कुमार का आरोप था कि गौतमबुद्धनगर पुलिस ने उनके परिजनों और रिश्तेदारों को प्रताड़ित करती रही जबकि आरोपियों को शह देती रही। पोस्टमार्टम के बाद शव ले जाने के दौरान चोला थाने पर रोककर गौतमबुद्धनगर पुलिस ने फिर से उन्हें धमकाया।
कृष्ण कुमार ने बताया कि अपहरण होने के बाद उन्होंने पुलिस को आरोपियों के नाम भी बताए थे। आरोपी उनकी साली के खानदानी हैं। पुलिस ने आरोपियों को नहीं पकड़ा, पीड़ित परिवार के ही कई लोगों को हिरासत में ले लिया। उनकी पिटाई की और अधमरा करके छोड़ा। पुलिस की पिटाई से उनका भतीजा सचिन गंभीर रूप से घायल है।
उसका नोएडा के एक अस्पताल में उपचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को कई बार बता चुके हैं कि अपहरण करने वाले परिवार के लोग नहीं हैं। आरोप लगाया कि पुलिस ने नामजद बताए गए एक आरोपी को दो दिन पहले हिरासत में लिया था। उसे थाने में रखकर पुलिस उसकी सेवा कर रही थी। अगर पुलिस चाहती तो कड़ी पूछताछ करके कुणाल को जिंदा बरामद कर सकती थी।
ढाबा संचालन को लेकर विवाद
पीड़ित कृष्ण कुमार सिंह का कहना था कि शिवा ढाबे को पहले मनोज, उमेश, अशोक, कुलदीप और राजेंद्र चलाया करते थे। इसके बाद यह ढाबा उनके पास आ गया। इसके एवज में उन्होंने पांचों को 23 लाख रुपये दिए थे।
ढाबा संचालक के अगवा बेटे को ढूंढ निकालने में पुलिस नाकाम साबित हुई। पांच दिन तक परिजन और ग्रामीण प्रदर्शन कर जांच करने की मांग करते रहे। वहीं पुलिस इसे अपहरण का मामला मानने से इन्कार करती रही। बाद में पुलिस ने अगवा करने की बात मानी हालांकि इसके बाद परिजनों से पूछताछ और मारपीट की गई। ढाबा संचालक कृष्ण कुमार शर्मा का आरोप है कि बीटा- 2. पुलिस की लापरवाही से बेटे कुणाल की जान गई।
वह शुरू से ही अनहोनी की आशंका "जताते रहे। लेकिन पुलिस ने उनकी नहीं सुनी। समय रहते पुलिस कार्रवाई करती तो बेटे की जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि हत्या का दोष पुलिस पर है। वह पुलिस को कभी माफ नहीं करेंगे।इससे पहले रविवार सुबह बुलंदशहर में अपहृत किशोर का शव मिलने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई सामने
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर भारी वस्तु के प्रहार से मौत | कोलम होने की बात सामने आई है। कुणाल के सिर पर लाठी या अन्य किसी ठोस वस्तु से प्रहार सिर पर भारी वस्तुया। इसके चलते ब्रेन के प्रहार से मौत में चोट पहुंची। चोट बाहरी तरफ न खुलकर अंदर ही ब्लीडिंग होती रही। हत्या के बाद शव नहर में फेंक दिया गया। जांच के लिए विसरा प्रिजर्व कर फोरेंसिक लैब भेजा गया है।