नोएडा। ‘पापा की मेहनत को जानती थी। करीब डेढ़ माह से तो उन्होंने दिन-रात प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया था, इसलिए पहले से ही जानती थी कि पैरालंपिक से पापा निश्चित ही पदक लेकर आएंगे।’ गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी सुहास एलवाई की बेटी शान्हवी ने यह बात पत्रकारों को बताई। शाहन्वी ने बताया कि रात 10 बजे जब हम सोने के लिए जाते थे, तब पापा प्रैक्टिस करने के लिए निकलते थे। दिन में प्रशासनिक काम और अलसुबह और देर रात घंटों बैडमिंटन की प्रैक्टिस करना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन पापा ने यह सब कर दिखाया। आज बहुत खुशी हो रही है जब वह रजत जीतकर लौटे हैं।
पत्रकारों से बात करते हुए सुहास एलवाई ने कहा कि काम कोई भी हो, वह मुश्किल नहीं होता। बस एक बार अगर ठान लिया जाए तो वह निश्चित ही पूरा होता है। इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि आप पहला कदम बढ़ाइए बाद में पूरी कायनात आपको वो देगी जो आप चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पैरालंपिक में बैडमिंटन सबसे ज्यादा चुनौती वाला खेल है। इसमें कई देशों के एक से एक अच्छे खिलाड़ी शामिल होते हैं। सभी खिलाड़ियों का यह मकसद होता है कि वह विश्व स्तर पर पदक जीतकर अपने देश का नाम रोशन करे। मैंने भी अपने देश के लिए रजत जीता है।
यह पदक को देशवासियों को ही समर्पित करता हूं। उन्होंने कहा कि यह मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा पल है। अब इस पल को मैं जीना चाहता हूं। सुहास ने यह भी बताया कि पैरालंपिक में जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन ने उन्हें जीत का हौसला दिया था। पदक जीतने के बाद उन्होंने फोन करके भी मेरा हौसला बढ़ाया। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री ने मुझे फोन किया। जब छोटा था तो कभी सोचा नहीं था कि मुझे इतनी हौसला आफजाई मिलेगी।