लखनऊ। मशहूर अभिनेत्री लिलेट दुबे का दिल को छू लेने वाला अभिनय, दिमाग को झकझोरने वाले संवाद और पीढ़ियों के अंतर्द्वंद्वों व संघर्षों को समेटे हुई कहानी रविवार को ‘डांस लाइक ए मैन’ नाटक में एक साथ उतरी। मौका था संगीत नाटक अकादमी में चल रहे कबीर महोत्सव के समापन का।
अंतिम दिन दर्शकों ने द प्राइमटाइम थिएटर कंपनी की ओर से प्रस्तुत किए गए नाटक को भरपूर प्यार दिया। महेश दत्तानी के लिखे नाटक का निर्देशन लिलेट दुबे ने किया। मंच पर अनंत महादेवन, लिलेट दुबे, सुचित्रा पिल्लई व जॉय सेनगुप्ता ने अभिनय किया। कहानी दो भरतनाट्यम कलाकारों जयराज व रत्ना की है, जिनकी बेटी लता शानदार डांसर होती है। उसकी सफलता तनाव पैदा करती है। दर्शकों को पारिवारिक संबंधों व पीढ़ियों के बीच संघर्ष के अंधेरे रहस्यों में खींच लिया जाता है। नाटक में पीढ़ियों के बीच के अंतर्द्वंद, मनोभाव को शानदार तरीके से पेश किया गया।
समापन पर लखनऊ की मलंग शामों, चाय व दोस्तों के साथ तस्वीरें व सामूहिक कंदीलें भी उड़ाई गईं। कार्यक्रम में गुरुदत्त जी-जिन्होंने नाज है हिंद पर, वो कहां हैं शीर्षक फिल्म की स्क्रीनिंग व डिस्कशन कार्यक्रम में समन हबीब, डॉ. हरिओम व डॉ. अविनाश ने अपने विचार व्यक्त किए। हिंदी सिनेमा व फिल्मों को समझने के लिए समझो सिनेमा कार्यशाला भी हुई। साथ ही कबीर पुरस्कार वितरित किए गए। पेंटिंग व नुक्कड़ नाटक भी हुए।
चार किताबों का हुआ विमोचन
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में चार किताबों के विमोचन हुए। डॉ. उत्कर्ष सिन्हा की खजुराहो डायरी, दीपिका चतुर्वेदी की गोमती नदी, तबस्सुम की स्वतंत्रता संग्राम में महिलाएं व अरशाना अजमत की सेक्स सोसाइटी एंड शी पुस्तकों के विमोचन हुए।
खामोश! अदालत जारी है...
अदालत से जुड़े किस्से जब दर्शकों ने सुने तो उनकी उत्सुकता और भी बढ़ गई। कबीर महोत्सव के मंच पर खामोश अदालत जारी है... कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ एडवोकेट आईबी सिंह ने की। कार्यक्रम में कोर्ट की ड्रेस, इतिहास, मुकदमों, दिलचस्प अंदरूनी कहानियों को सुनाया गया।
कबीर महोत्सव में शहरवासी।
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