ग्रेटर नोएडा। प्रदेश के शो विंडो माने जाने वाले जिले गौतमबुद्ध नगर के गांवों में हांफ रहीं स्वास्थ्य सेवाओं को ऑक्सीजन की दरकार है। व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं होने से ही ग्रामीणों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। अधिकांश मौत शहर के निकट वाले गांव में हो रही हैं। मुख्यमंत्री के दौरे की आहट से अफसरों और नेताओं ने गांवों का रुख जरूर किया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में चौपट पड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं में विशेष सुधार नहीं हुआ है। अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके पड़े हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अभी भी उपचार या परीक्षण का बंदोबस्त नहीं है। इस कारण ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टर से उपचार कराने को विवश हैं।
कस्बों से जुड़े स्वास्थ्य केंद्र को अपडेट करने का प्रयास जरूर किया गया, लेकिन वह संक्रमण की रोकथाम के लिए नाकाफी है। आलम यह है कि कोरोना या मौसमी बीमारी के लक्षण, परीक्षण, वैक्सीनेशन, उपचार और अंत्येष्टि तक में असमंजस बना है। सही सलाह, उपचार आदि की जानकारी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिलाधिकारी गांव में निगरानी कमेटी बनाकर क्रियाशील करने का दावा जरूर कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर सुधार दिखाई नहीं दे रहा। हालांकि, जेवर में कोविड अस्पताल की तर्ज पर दनकौर और रबूपुरा में भी अस्पताल बनाने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीण अंचलों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पेश है रिपोर्ट...
अस्पताल में नहीं मिल रहा इलाज, घर में ऑक्सीजन ले रहीं अस्थमा पीड़ित बुजुर्ग
कोरोना के कारण अन्य बीमारियों के पीड़ितों को भी अस्पतालों में उपचार नहीं मिल पा रहा है। इससे गंभीर बीमारों और बुजुर्गों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दयौरार गांव निवासी 75 वर्षीय देवकी लंबे समय से सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। उनका इलाज खुर्जा के निजी अस्पताल में चल रहा था, लेकिन कोरोना के कारण अस्पताल ने इलाज से मना कर दिया। परिजन ने आसपास के अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन लाभ नहीं मिला। वहीं, देवकी की हालत बिगड़ती चली गई। अब परिजन प्रशासन की मदद से सिलिंडर लेकर उनको घर पर ऑक्सीजन देने को विवश हैं।
बिसाहड़ा के स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का बोलबाला
बिसाहड़ा गांव इकलाख हत्याकांड के बाद से देश भर में सुर्खियों में रहा था। यहां आलाधिकारियों और तमाम नेताओं का लंबे समय तक जमावड़ा रहा, लेकिन यहां के स्वास्थ्य केंद्र की किसी ने सुध नहीं ली। स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। इसके अलावा क्षेत्र के अन्य कई स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं। क्षेत्र के कई गांव में या तो सैनिटाइजेशन नहीं हुआ या फिर खानापूर्ति हुई है। वहीं, जागरूकता के अभाव में कई ग्रामीण जांच व वैक्सीनेशन कराने में कम रुचि दिखा रहे हैं।
रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर इलाज-दवा के लिए भटक रहे
दनकौर, बिलासपुर स्थित स्वास्थ्य केंद्र में जांच तो हो रही है, लेकिन रिपोर्ट आने में एक सप्ताह लग रहा है। वहीं, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है, उनको न तो उपयुक्त उपचार मिल पा रहा है और न ही समय पर दवाएं मिल पा रही हैं। इस कारण ग्रामीणों की हालत बिगड़ रही है और कई दम भी तोड़ चुके हैं। कई मरीज अपने घरों में उपयुक्त उपचार का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, रबूपुरा समेत 50 गांवों के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है, लेकिन यहां जांच और उपचार का प्रबंध नहीं हैं। वहीं, जानकारी के अभाव में ग्रामीण वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन भी नहीं कर पा रहे हैं। व्यवस्थाओं की कमी से ग्रामीण झोलाछाप से उपचार कराने को विवश हैं। अब तक 20 लोग दम तोड़ चुके हैं।
उपचार में लापरवाही के प्रमुख मामले
1 . सैनी गांव निवासी युवक को परिजन ने बमुश्किल निजी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल से परिजन को ऑक्सीजन लाने के लिए बोला गया। परिजन सूरजपुर ऑक्सीजन प्लांट पर पहुंचे। यहां से मजिस्ट्रेट से अनुमति लेकर आने के लिए कहा गया। परिजन एसडीएम के पास पहुंचे तो उन्हें अभद्रता कर भगा दिया गया। युवक की मौत के बाद परिजन ने मामले में केस दर्ज करने की मांग की।
2. गेझा गांव निवासी महिला की हालत बिगड़ने पर परिजन रातभर गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के अस्पताल लेकर दौड़ते रहे। गुलावठी रोड के अस्पताल में बेड मिला, लेकिन ऑक्सीजन नहीं। परिजन जब तक ब्लैक में ऑक्सीजन लेकर पहुंचे महिला ने दम तोड़ दिया।
3. साकीपुर गांव निवासी महिला को लेकर परिजन निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन भर्ती नहीं किया गया। अस्पताल में तैनात बाउंसरों ने परिजन से अभद्रता की। उपचार के अभाव में महिला की मौत हो गई।
4. दादरी के अस्पताल में युवक की मौत के बाद परिजन ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगा जमकर हंगामा किया था। इस दौरान एक स्वास्थ्य कर्मी डंडा लेकर परिजन की ओर दौड़ा था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।