माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने तीन करोड़ रुपये के साइबर ठगी के एक मामले में आरोपी सुमित जिंदल की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि अपराध की प्रकृति गंभीर प्रतीत होती है। आरोपी के जमानत पर रिहा होने से जांच और साक्ष्यों की सुरक्षा पर असर पड़ने का जोखिम है।
मामला साइबर थाने में दर्ज है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सेक्टर-27 में रहने वाले अशोक अग्रवाल (68) से लगभग 3 करोड़ 13 लाख रुपये का साइबर फ्रॉड किया था। मामले में वादी ने शेयर ट्रेडिंग से सुमित जिंदल एवं अन्य सह आरोपियों के माध्यम से अपनी धनराशि निवेश की थी। प्रारंभ में पैसा उसके ही डिमेट अकाउंट से ट्रेडिंग में गया। लेकिन लाभ की रकम सीधे आरोपी के अकाउंट में ट्रांसफर हो गई। अभियोजन के अनुसार आरोपी और उसके सह आरोपियों ने फर्जी सेबी रजिस्ट्रेशन और ऐप के माध्यम से अशोक अग्रवाल को धोखा दिया, जबकि वास्तविक कंपनी और पते का कोई अस्तित्व नहीं था। जब वादी ने पैसे निकालने की कोशिश की तो उसे रकम नहीं मिली।
न्यायालय ने अपने आदेश में उच्च न्यायालय इलाहाबाद के पिछले आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि साइबर अपराध समाज में तेजी से फैल रहे हैं और इस प्रकार के मामलों में सावधानी आवश्यक है। अपराध की गंभीरता और जांच की प्रकृति को देखते हुए आरोपी की जमानत अस्वीकार की जाती है।